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अफ़ज़ल को फाँसी दिया जाना टला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय संसद पर दिसंबर 2001 में हुए हमले के मामले में दोषी पाए गए मोहम्मद अफ़ज़ल को शुक्रवार को फाँसी नहीं दी जाएगी. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार उन्हें 20 अक्तूबर को फाँसी दी जानी थी लेकिन प्रशासन ने इसे टालने का फ़ैसला किया है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम अफ़ज़ल की पत्नी की ओर से दायर उनकी सज़ा माफ़ करने की अपील पर निर्णय ले सकें. अफ़ज़ल की पत्नी के वकील का कहना है कि वे राष्ट्रपति अब्दुल कलाम से ख़ुद भी मिलेंगी और अफ़ज़ल का पक्ष रखेंगी. उन्हें सज़ा सुनाए जाने का कई मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था. भारत प्रशासित कश्मीर समेत अनेक जगह पर विरोध प्रदर्शन भी हुए. फाँसी दिए जाने का विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि अफ़ज़ल का मुकदमा न्यायोचित ढंग से नहीं चला. लेकिन दक्षिणपंथी गुट और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ज़ोर देकर कह रहे हैं कि अफ़ज़ल को फाँसी दी जाए. |
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