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गुरुवार, 03 अप्रैल, 2008 को 15:09 GMT तक के समाचार
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कांग्रेस से समझौते की पहल नहीं: मुलायम
मुलायम सिंह यादव
मुलायम सिंह यादव और कांग्रेस के रिश्ते काफ़ी तल्ख़ हो गए थे
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और यूएनपीए अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि कांग्रेस के साथ आगामी चुनावों के लिए किसी तरह के गठबंधन की कोई पहले दोनों ओर से नहीं हुई है.

मुलायम सिंह ने कहा कि वे पहले भी कहते रहे हैं और अभी भी कहते हैं कि बहुजन समाज पार्टी से नुक़सान कांग्रेस को ही है. उत्तरप्रदेश में भी और दूसरे राज्यों में भी.

मुलायम सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तरप्रदेश में मायावती और उनकी पार्टी से कांग्रेस की दूरी बढ़ती दिख है और समाजवादी पार्टी से कांग्रेस की नज़दीकी की अटकलें लगाई जा रही हैं.

वर्तमान राजनीतिक समीकरणों पर बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी ने उनसे बातचीत की. प्रस्तुत है प्रमुख अंश-

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कानपुर अधिवेशन में दिग्विजय सिंह ने आपकी तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ाया. उन्होंने आपकी तारीफ़ की कि आपने भाजपा से लड़ाई लड़ी. उन्होंने कहा कि उन्हें आपसे तालमेल करने में कोई परहेज़ नहीं है.

दिग्विजय सिंह कांग्रेस के नेता हैं. वो मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. अलग-अलग दलों में रहते हुए भी मेरे उनसे अच्छे रिश्ते हैं. मैं उनका बहुत आदर करता हूँ, वह भी मेरा आदर करते हैं. यह खुशी की बात है कि वो कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी हैं.

जहां तक यूएनपीए का सवाल है जिसका मैं चेयरमैन हूँ, राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता. इस तरफ़ दिग्विजय सिंह ने एक अच्छा कदम उठाया है. अलग-अलग दलों में रहते हुए भी, एक दूसरे से बातचीत करना मुश्किल हो जाए, यह अच्छी बात नहीं है. हम किसी को राजनीतिक विरोधी तो मानते हैं, लेकिन दुश्मन नहीं मानते.

जहाँ तक नीतियों का सवाल है, जबसे यूएनपीए बना है, हमारे बीच दूरियाँ बढ़ रही थीं, बातचीत नहीं हो रही थी. यह अच्छा नहीं है. मैं चाहता हूं कि यह वातावरण हर दल में हो. हमें देश के मामलों पर एक हो जाना चाहिए. जब-जब देश का मामला आया है, हम एक हुए हैं.

 हम चाहते है कि यूएनपीए इतना मज़बूत हो जाए कि दिल्ली में उसके बिना कोई सरकार न बन पाए

लेकिन उनके बयान से ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आपका-उनका लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई समझौता हो सकता है.

नहीं, इस तरह का प्रस्ताव न हमारी तरफ़ से आया है न उनकी तरफ़ से. यह ज़रूर है कि हमारी तरफ़ से कोई कटुवाणी में नहीं बोल रहा है, लेकिन उनकी तरफ़ से बोलते रहते हैं. हमने पहले भी कहा था बसपा से निकटता कांग्रेस के लिए ख़तरा है, मेरा भाषण आप देख सकते हैं. हमारा कोई नुकसान नहीं है. नुक़सान और ख़तरा कांग्रेस को ही है.

बसपा ने उत्तर प्रदेश में नुक़सान किया, वह ठीक है. लेकिन हमारा वोट प्रतिशत बढ़ा है जबकि कांग्रेस का बहुत नुकसान हुआ है. अब कांग्रेस को अन्य सूबों में भी नुक़सान होगा. हमारे और कांग्रेस के बीच समझौते की कोई पहल नहीं है.

पहल की कोई गुंजाइश है?

यूएनपीए के रहते हम ऐसा कुछ नहीं कह सकते. हम चाहते हैं कि यूएनपीए इतना मज़बूत हो जाए कि दिल्ली में उसके बिना कोई सरकार न बन पाए.

इधर वाममोर्चा भी एक तीसरे मोर्चा बनाने की बात कह रहा है. क्या आपका समझौता वाममोर्चे के साथ हो सकता है?

अब तो यूएनपीए बन गया है. इसके बावजूद पता नहीं कैसे तीसरे मोर्चे का बयान आ रहा है. अभी दिल्ली में इन मुद्दों को लेकर हमारी उनसे बातचीत हुई थी. हमारा उनसे चीन के साथ सीमा विवाद और तिब्बत को लेकर मतभेद है. इस मुद्दे पर सपा की राय अलग है और लेफ्ट की राय अलग है. इसके अलावा कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर हमारी राय एक है.

अगर ऐसी स्थिति बने की वाम मोर्चा परमाणु करार के मामले पर यूपीए सरकार से अलग हो जाए तो क्या आपका और उनका कोई औपचारिक गठबंधन हो सकता है?

परमाणु क़रार के मामले पर सपा किसी से पीछे नहीं है. यह अच्छा है कि यह मुद्दा लेफ्ट के पास रहा है. हम शुरू से इसके ख़िलाफ़ हैं. वो तो सरकार को समर्थन दे रहे हैं.

सरकार से अलग होने पर उनके साथ कोई समझौता हो सकता है.

वामदलों से हमारे रिश्ते हमेशा से अच्छे रहे हैं. जब भी ऐसी स्थिति आई है हम और वामपंथी एक साथ लड़े हैं. साथ-साथ लड़े हैं.

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