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सोनिया के अध्यक्ष के रूप में 10 साल
सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने संकट के दौर में पार्टी को एकजुट बनाए रखा
सोनिया गांधी शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में 10 साल पूरे कर एक कीर्तिमान स्थापित करने जा रही हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों की एक बैठक हुई जिसमें एक प्रस्ताव पारित कर पार्टी में उनके योगदान की प्रशंसा की गई.

कांग्रेस नेता प्रणव मुखर्जी ने कहा,'' हम पार्टी को नेतृत्व प्रदान करने के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं. ये कांग्रेस के 122 साल के इतिहास में ऐतिहासिक क्षण हैं.''

 हम पार्टी को नेतृत्व प्रदान करने के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं. ये कांग्रेस के 122 साल के इतिहास में ऐतिहासिक क्षण हैं
कांग्रेस नेता प्रणव मुखर्जी

सोनिया गांधी ने 1998 में सीताराम केसरी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष का पद उस वक्त संभाला था जब भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) केंद्र में सत्ता में था.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सोनिया का सबसे बड़ा योगदान ये रहा कि उन्होंने न केवल संकट के दिनों में पार्टी को एकजुट बनाये रखा बल्कि धीरे-धीरे उसे सत्तावापसी की राह पर भी वापस ला दिया.

लंबा कार्यकाल

जब सोनिया इंदिरा गांधी की बहू बनी थीं उस वक्त उन्हें राजनीति में कोई विशेष दिलचस्पी नहीं थी. लेकिन दिलचस्प तथ्य ये है कि गांधी नेहरू परिवार के अन्य सदस्यों की तुलना में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल पूरा किया है.

सोनिया गांधी
सोनिया गांधी को विदेशी मूल के मुद्दे को लेकर कटु आलोचना झेलनी पड़ी है

पार्टी नेता जनार्दन द्विवेदी का कहना है कि कांग्रेस के 122 साल के इतिहास में पार्टी के किसी अध्यक्ष ने इतना लंबा और सफल कार्यकाल पूरा नहीं किया.

सोनिया ने मई, 2004 में हुए लोकसभा चुनावों के पहले ग़ैर भाजपा दलों को एक मंच पर लाकर एक तरह से यह सुनिश्चित कर दिया कि एनडीए सत्ता में वापस न आए.

सोनिया गांधी को कड़े विरोध का सामना भी करना पड़ा है. विदेशी मूल के मुद्दे को लेकर उन्हें विरोधियों की कटु आलोचना झेलनी पड़ी है.

साथ ही मेनका गांधी जैसे परिवार के अन्य सदस्यों की चुनौती का भी सामना करना पड़ा है.

उन्होंने मई, 2004 में लोक सभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री का पद स्वीकार न कर काफ़ी लोकप्रियता अर्जित की.

लाभ के पद को लेकर उठे विवाद के बाद सोनिया गांधी ने अपनी रायबरेली सीट से इस्तीफ़ा दे दिया था और वो वहाँ से फिर चुनाव जीतीं.

कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ सोनिया राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (यूपीए) की भी अध्यक्ष हैं और उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि विभिन्न दबावों के बावजूद गठबंधन ठीक तरह से चलता रहे.

ये बात इसलिए भी अहम है क्योंकि कांग्रेस ने पहली बार अन्य दलों के साथ मिलकर केंद्र में गठबंधन सरकार बनाई है.

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