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ग्यारह वर्षीय देवी की रिटायरमेंट! | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में जीती जागती देवी के रुप में पूजी जाने वाली एक लड़की को 11 वर्ष की उम्र में अपने काम से रिटायरमेंट मिल गई है. ग्यारह वर्षीय सजनी शाक्य नेपाल में पूजी जाने वाली तीन देवियों में से एक हैं लेकिन अब उसे उन रीति रिवाजों से मुक्ति मिल गई है जो देवी के रुप में उसे पूरी करनी पड़ती थीं. नेपाल में परंपरा के अनुसार काठमांडू समेत तीन शहरों में बचपन में ही एक बच्ची को चुन लिया जाता है जो तब तक देवी रहती हैं जब तक उनका मासिक धर्म शुरु नहीं हो जाता. इन्हें नेपाल में 'कुमारी' कहा जाता है. कुछ दिनों पहले अमरीका की यात्रा करने के कारण सजनी शाक्य को देवी के पद से हटाया गया था लेकिन फिर उन्हें देवी मान लिया गया. सजनी शाक्य दो वर्ष की उम्र में भक्तपुर शहर की 'कुमारी' बनी थीं और अब उन्हें इस पद से मुक्त मिली है. आम तौर पर लड़कियाँ 12 से 13 वर्ष की उम्र में इस पद से मुक्त होती हैं.
हालांकि उनके पिता का कहना है कि एक दो साल पहले पद से मुक्ति मिलने को किसी भी तौर पर अमरीका जाने संबंधी विवाद से नहीं जोड़ा जा सकता है. सजनी के परिवार के अनुसार वो सजनी के ब्याह संबंधी एक रीति पूरी करना चाहते थे इसलिए वो जल्दी रिटायर हुई हैं. सजनी के जाने के बाद अब सोमवार से भक्तपुर शहर में एक बार फिर नई देवी के लिए खोज शुरु हो जाएगी. देवी बनने के लिए किसी भी बच्ची को कई परीक्षणों से गुजरना पड़ता है. उसी बच्ची को देवी बनाया जाता है जिसमें 32 गुण हों. सजनी अपनी जल्दी रिटायरमेंट से खुश हैं, ये तो कहना मुश्किल है, क्योंकि पिछले वर्ष वाशिंगटन में उन्होंने कहा था कि जब वो देवी नहीं रहेंगी तो उनके साथ अच्छा सलूक नहीं किया जाएगा. |
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