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बिहार में हिंसा के मामले में गिरफ़्तारियाँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के हाजीपुर में भीड़ के पुलिस हिरासत में बंद एक शख्स को पीट-पीटकर अधमरा कर देने के मामले में सात लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. साथ ही इस मामले में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. ग़ौरतलब है कि रवि कुमार नामक ये शख्स अपने साथी की हत्या के आरोप में बंद था और इस दौरान हुई हिंसा में घायल होने के कारण पुलिस उसे अस्पताल लाई थी. शनिवार को जब पुलिस सुरक्षा में अस्पताल लाया गया था लेकिन भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में हथकड़ियों में क़ैद इस शख्स पर हमला बोल दिया और बेरहमी से उसके साथ मारपीट की. टीवी चैनलों में पुलिस की मौजूदगी में बेदर्दी से पीटे जाने की तस्वीरें दिखाए जाने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया. मामले ने तूल पकड़ा पुलिस का कहना है कि भीड़ के गुस्से के शिकार हुए इस शख्स की हालत गंभीर बनी हुई है. हाजीपुर के पुलिस अधीक्षक पारसनाथ ने बीबीसी से बातचीत में स्पष्ट किया था कि पुलिसकर्मी पीटने की घटना में भीड़ के साथ शामिल नहीं थे. लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया ये पुलिसकर्मी रवि कुमार को भीड़ के आक्रोश से बचा पाने में विफल रहे. इस तरह की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शनिवार को दिल्ली में न्याय सुधारों पर आयोजित सम्मेलन में ऐसी घटनाओं के प्रति लोगों को आगाह किया. उनका कहना था, '' निश्चित रूप से हम ऐसी स्थिति की अनुमति नहीं दे सकते हैं जहाँ कोई क़ानून अपने हाथ में ले और भीड़ हिंसा पर उतारू हो जाए.'' |
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