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बिहार में एक और आँख फोड़ कांड | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के नवादा ज़िले के तेलगीखटांगी गाँव के पास भीड़ ने तीन युवकों की आँखें फोड़ दीं. कथित तौर पर ये तीनों एक व्यक्ति की मोटरसाइकिल छीन कर भाग रहे थे जिन्हें भीड़ ने दबोच लिया और उनकी लाठी-डंडों से पिटाई की. जबकि इन युवाओं पिंकू सिंह,गुड्डू सिंह और साकेत सहनी का आरोप है कि माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के लोगों ने आपसी दुश्मनी के कारण उनकी आंखों में पहले तेज़ाब डाला, फिर आँखें निकाल लीं. नवादा ज़िले में एमसीसी का खासा प्रभाव माना जाता है. इन इलाक़ों में माओवादी संगठनों पर जन अदालत लगाकर अपराधियों को मौक़े पर ही सज़ा देने का आरोप लगता रहा है. इस कांड ने 22 वर्ष पुराने भागलपुर के चर्चित आँखफोड़ कांड की याद ताज़ा कर दी है जिसमें पुलिस पर आरोप लगा था कि उसने कई अपराधियों की आँखों में तेज़ाब डाल कर आँखें फोड़ दी थीं. पटना मेडिकल कालेज अस्पताल में इन युवाओं का इलाज कर रहे डाक्टर अजय कुमार ने बताया,'' पिंकू और गुड्डू की एक-एक आँख फूट चुकी है जबकि जबकि साकेत की आँखों को बुरी तरह नुक़सान पहुँचा है.'' बीस से पच्चीस वर्ष उम्र के इन कथित मोटरसाइकिल लुटेरों में से एक साकेत सहनी ने कहा, '' एमसीसी के लोगों ने चार साल पहले मेरे बहनोई युवराज सहनी की हत्या कर दी थी और उनके घर को डायनामाइट से उड़ा दिया था. इसके बाद हमने इस मामले में शामिल कई को गिरफ़्तार करने में पुलिस की मदद की थी. उन्होंने उसी दुश्मनी का हमसे बदला लिया है.'' पुलिस रिकॉर्ड इधर स्थानीय पुलिस ने इस घटना के बाद इलाक़े में किसी तरह के तनाव की बात को ख़ारिज करती है.
स्थानीय पुलिस का कहना है कि पिंकू और साकेत के आपराधिक रिकॉर्ड रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इन तीनों को पकड़ा गया तो कुछ देर के बाद हथियारों से लैस लोगों ने इन्हें अपने क़ब्ज़े में कर लिया. इस मामले में स्थानीय सिरदला थाने में महेंद्र प्रसाद ने इन तीन युवाओं पर अपनी मोटरसाइकिल छीनने की शिकायत दर्ज कराई है. जबकि स्थानीय सिरदला थाना के अघिकारी मनोज कुमार का कहना है कि अज्ञात भीड़ के खिलाफ़ लोगों की आँखें फोड़ने का मामला दर्ज किया गया है और इस मामले में शामिल लोगों को गिरफ़्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं. |
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