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नज़रबंद जस्टिस चौधरी सक्रिय हुए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने इस्लामाबाद में नज़रबंद रहते हुए टेलीफ़ोन के ज़रिए कराची में वकीलों को संबोधित किया है. जस्टिस चौधरी ने इस संबोधन के ज़रिए वकीलों से कहा कि नई सरकार को उन जजों को बहाल करने के लिए क़दम उठाना चाहिए जिन्हें राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने आपातकाल के दौरान पद से हटा दिया था. जस्टिस चौधरी को नवंबर 2007 में लगाए गए आपातकाल के दौरान फिर से हटा दिया गया था. उससे पहले मार्च 2007 में उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया गया था लेकिन क़ानूनी लड़ाई के बाद उन्हें पद पर बहाल किया गया था. जस्टिस चौधरी का नाम पाकिस्तान न्यायिक स्वतंत्रता का प्रतीक बन गया है क्योंकि उन्होंने अनेक संवेदनशील मुद्दों पर फ़ैसले दिए जिनमें लापता लोगों का मुद्दा भी था. संवाददाताओं का कहना है कि गुरूवार को इस्लामाबाद में अपने घर में नज़रबंद जस्टिस चौधरी ने मोबाइल टेलीफ़ोन के ज़रिए कराची में वकीलों को संबोधित किया. यह मोबाइल फ़ोन जस्टिस चौधरी के समर्थकों ने उनके घर पहुँचाया. जस्टिस चौधरी ने इस संबोधन के ज़रिए नवनिर्वाचित सांसदों से अपील की है कि नवंबर 2007 में लगाए गए आपातकाल के दौरान सरकार ने जो संविधान विरोधी क़दम उठाए उन्हें उलट दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर संसद नवंबर, 2007 के बाद से किए गए संवैधानिक संशोधनों को अपनी मंज़ूरी दे देती है तो उनके इस क़दम से मुल्क में सिर्फ़ एक ही व्यक्ति के अधिकार और मज़बूत हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो कोई पुलिस अधिकारी भी जजों पर दबाव डालकर मनपसंद फ़ैसले ले सकेगा और कोई भी आदमी सुरक्षित नहीं रहेगा. इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने कहा, "देश में पिछली संसद ने एक ही व्यक्ति को अधिकार देकर एक नकारात्मक बुनियाद डाली थी जो किसी भी तरीक़े से बेहतर अमल नहीं था. अगर नवनिर्वाचित संसद इसी सिलसिले को बरक़रार रखेगी तो हर आदमी, चाहे वो पुलिस वाला हो या और कोई, अदालती फ़ैसलों पर असर डाल सकता है." हाथापाई उनका कहना था कि अगर एक ही व्यक्ति को संविधान में संशोधन के अधिकार दिए जाएंगे तो देश में कोई भी संस्था आज़ाद और स्वायत्त नहीं रह सकेगी और संसद की हैसियत भी ख़त्म हो जाएगी.
जस्टिस इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने कहा कि अस्थाई संवैधानिक आदेश के तहत शपथ लेने वाले जजों को एक प्रशासनिक आदेश के ज़रिए अदालतों में बिठाया गया है, जबरन रिटायर किए गए जज भी ऐसे ही प्रशासनिक आदेश के ज़रिए बहाल हो सकते हैं और जजों की बहाली के लिए संसद में दो तिहाई बहुमत की ज़रूरत नहीं है. पूर्व चीफ़ जस्टिस इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने तीन नवंबर 2007 को लगाए गए आपातकाल को असंवैधानिक क़रार दिया और आम लोगों और वकीलों के आंदोलन को बधाई देते हुए कहा कि अब ये संघर्ष रंग लाएगा. इससे पहले वकीलों ने सिंध हाई कोर्ट और निचली अदालतों का पूरी तरह बहिष्कार किया जबकि कराची बार एसोसिएशन के वकीलों के जुलूस पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया और आँसू गैस भी छोड़ी. कराची के अलावा, लाहौर और क्वेटा में भी वकीलों ने मुशर्रफ़ विरोधी जुलूस निकाले और उनके पुतले जलाए. वकीलों ने अपनी बैठक के बाद मुशर्रफ़ विरोधी जुलूस निकाला तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की और इस दौरान वकीलों और पुलिस अधिकारियों में हाथापाई भी हुई जिसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज किया जिसमें कुछ वकीलों को चोट आई. पुलिस ने जुलूस में शामिल दस से ज़्यादा वकीलों को गिरफ़्तार भी किया. |
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