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मंत्री को छुड़ाने के लिए कमांडो लगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका के एक टेलीविज़न स्टेशन में उस मंत्री को छुड़ाने के लिए कमांडो का सहारा लिया गया है जिन्हें कुछ पत्रकारों ने इन आरोपों के साथ हिरासत में ले लिया था कि उनके एक सहायक ने एक वरिष्ट पत्रकार के साथ बदतमीज़ी की. पत्रकारों का आरोप था कि श्रम और मानव संसाधन मंत्री मेरविन सिल्वा मंत्री के सहायक ने एक समाचार निदेशक के साथ बदतमीज़ी की और उसी के बाद मंत्री को हिरासत में लिया गया. नाराज़ पत्रकारों ने मंत्री को तब तक रिहा करने से इनकार कर दिया था जब तक वह अपने सहायक की कथित बदतमीज़ी के लिए माफ़ी ना मांगें. स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार को वहाँ अनेक कमांडो को भेजना पड़ा लेकिन जब उन्हें टेलीविज़न केंद्र की इमारत से बाहर निकाला जा रहा था तो उनके सिर में मामूली सी चोट लग गई. खींचातान में मंत्री सिल्वा के ऊपर लाल रंग का कुछ रंग भी गिर गया जिससे उनकी चोट गंभीर होने का भ्रम बना. श्रीलंका के श्रम और मानव संसाधन मंत्री मेरविन सिल्वा राज्य संचालित रूपवाहिनी टेलीविज़न चैनल के दफ़्तर में यह शिकायत करने गए थे कि समाचारों में उनके दिए गए भाषणों में से एक को शामिल नहीं किया गया. टेलीविज़न स्टेशन के महानिदेशक का कहना है, "मंत्री के एक सुरक्षा गार्ड ने समाचार निदेशक के साथ बदसलूकी की और तमाम कर्मचारी इस मामले पर माफ़ी माँगे जाने की माँग कर रहे थे." शिकायत ख़बरों में कहा गया है कि इस खींचतान में समाचार निदेशक की क़मीज़ भी फट गई. इसी के विरोध में पत्रकारों ने मंत्री सिल्वा को बंधक बना लिया और उनसे घटना पर क्षमायाचना की मांग की. मेरविन सिल्वा की शिकायत थी कि राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्से के साथ एक समारोह के दौरान पत्रकारों ने उनके भाषण को कवर नहीं किया. ये समारोह 2004 में आए सूनामी के समय टूटे एक पुल को दोबारा से खोले जाने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था. टेलीविज़न की तरफ़ से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि मंत्री को कार्यालय के स्टाफ ने बंधक बनाया लेकिन तस्वीरों में सिल्वा एक छोटे कमरे में पुलिस कर्मियों से घिरे दिख रहे थे. जबकि एक दर्जन से ज्यादा टेलीविज़न कर्मचारी बरामदे में सिल्वा को तब तक छोड़े जाने का विरोध करते दिख रहे हैं जब तक कि वो समाचार निर्देशक से माफ़ी नहीं मांगते. मंत्री को बचाने के लिए टेलीविज़न केंद्र में पुलिस और कमांडो भेजे गए. मंत्री सिल्वा ने अनेक पत्रकारों के सामने कहा, "अगर मेरी कोई गतिविधि उन्हें ग़लत लगी हो तो मैं कर्मचारियों से माफ़ी मांगने के लिए तैयार हूँ." सुरक्षा बलों ने पत्रकारों की नाराज़गी के बीच ही मंत्री सिल्वा को इमारत से निकाल लिया. श्रीलंका के मीडिया मंत्री लक्ष्मा यपा ने सिल्वा के इस तरह से टेलीविज़न केंद्र में जाने की आलोचना करते हुए इस सारी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका में भीषण लड़ाई, अनेक मारे गए08 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीलंका के कामगारों के साथ 'दुर्व्यवहार'14 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस एलटीटीई और सेना के बीच भीषण संघर्ष03 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में भीषण संघर्ष जारी, 33 मरे17 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'हवाई हमले में घायल हुए प्रभाकरण'20 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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