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शुक्रवार, 21 दिसंबर, 2007 को 20:18 GMT तक के समाचार
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'समलैंगिकों के ख़िलाफ़ भेद-भाव न हो'
समलैंगिक
नेपाल में समलैंगिक भेद-भाव की शिकायत करते रहे हैं
नेपाल में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वो उन क़ानूनों को रद्द कर दें जिनसे समलैंगिकों के ख़िलाफ़ भेद-भाव की बू आती है.

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि समलैंगिकों को भी अन्य नागरिकों की तरह अधिकार दिए जाने चाहिए.

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फ़ैसले को बड़ी जीत बताया है. दक्षिण एशिया के रुढ़िवादी समाज में समलैंगिकता को 'ग़लत' माना जाता रहा है.

नेपाल में ऐसा कोई क़ानून नहीं है जो स्पष्ट रूप से समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में रखता हो लेकिन 'अप्राकृतिक यौनाचार' के लिए एक वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इसी के आधार पर आपस में शारीरिक संबंध बनाने वाले पुरुषों को गिरफ़्तार किया जाता है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, "नेपाल सरकार को इन लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए नए क़ानून बनाने चाहिए और मौजूदा क़ानूनों में बदलाव करने चाहिए."

समलैंगिकों के अधिकारों के लिए संघर्षरत ब्लू डायमंड सोसाइटी के अध्यक्ष सुनील बाबू पंत ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "यह काफी उत्साहजनक और प्रगतिशील फ़ैसला है."

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले पर सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

समलैंगिकमुट्ठी भर आसमां-1
सुनील बता रहे हैं अपना बचपन और समलैंगिकता का पहला अनुभव...
समलैंगिकसवाल समलैंगिकता का
...ताकि समलैंगिकता के सवाल को समझने का एक स्वस्थ मौका आपको मिले.
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