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पिता के उपनाम वालों को आरक्षण नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय के अधिकारियों का कहना है कि नाम के अंत में माँ की बजाय पिता का उपनाम जोड़ने वाले स्थानीय आदिवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा. अधिकारियों का कहना है कि नाम में पिता का उपनाम जोड़ने को आदिवासी समाज की मातृसत्तात्मक परम्पराओं का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसा करने वाले लोग संविधान में दिए गए आरक्षण लाभ से वंचित हो जाएंगे. राज्य के संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार जिन आदिवासी समूहों की अनुसूचित जनजाति के रूप में पहचान की गई है उनके लिए राज्य विधानसभा में कुछ सीटें निर्धारित करने का प्रावधान है. जनजातीय परम्परा इसके अलावा इन जनजातीय नागरिकों को शिक्षा और नौकरियों में भी वरीयता दी जाती है. मेघालय के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी एच एस शाइला का कहना है कि नाम में पिता का उपनाम लगाना स्थानीय जनजातीय परम्पराओं और क़ानून का उल्लंघन है. इन नए निर्देशों से आरक्षित सीटों से चुने गए कई स्थानीय राजनेताओं की सदस्यता पर असर पड़ सकता है क्योंकि उनका अनुसूचित जनजाति का दर्जा छिन सकता है. ग़ौरतलब है कि राज्य विधानसभा में 60 सीटें हैं जिनमें से पाँच को छोड़कर बाक़ी सभी अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें कैसे बचीं अंडमान की जनजातियाँ?04 जनवरी, 2005 | भारत और पड़ोस अंडमान में जनजातियों को ख़तरा30 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस नसंबदी पर पाबंदी है टोटोपारा में29 जून, 2004 | भारत और पड़ोस दिल्ली में गुर्जर समाज की रैली 17 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'पूर्वोत्तर की भी भागीदारी होगी'17 जून, 2007 | भारत और पड़ोस मेघालय में जनजातीय नेताओं की धमकी11 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस ज़्यादा बच्चे पैदा करने पर मिला पुरस्कार11 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'पदोन्नति में आरक्षण सही'19 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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