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गुरुवार, 20 दिसंबर, 2007 को 12:18 GMT तक के समाचार
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पिता के उपनाम वालों को आरक्षण नहीं

मेघालय की जनजातियां
भारत की कई जनजातियों में मातृसत्तात्मक समाज की परम्परा है.
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय के अधिकारियों का कहना है कि नाम के अंत में माँ की बजाय पिता का उपनाम जोड़ने वाले स्थानीय आदिवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा.

अधिकारियों का कहना है कि नाम में पिता का उपनाम जोड़ने को आदिवासी समाज की मातृसत्तात्मक परम्पराओं का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसा करने वाले लोग संविधान में दिए गए आरक्षण लाभ से वंचित हो जाएंगे.

राज्य के संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार जिन आदिवासी समूहों की अनुसूचित जनजाति के रूप में पहचान की गई है उनके लिए राज्य विधानसभा में कुछ सीटें निर्धारित करने का प्रावधान है.

जनजातीय परम्परा

इसके अलावा इन जनजातीय नागरिकों को शिक्षा और नौकरियों में भी वरीयता दी जाती है.

मेघालय के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी एच एस शाइला का कहना है कि नाम में पिता का उपनाम लगाना स्थानीय जनजातीय परम्पराओं और क़ानून का उल्लंघन है.

इन नए निर्देशों से आरक्षित सीटों से चुने गए कई स्थानीय राजनेताओं की सदस्यता पर असर पड़ सकता है क्योंकि उनका अनुसूचित जनजाति का दर्जा छिन सकता है.

ग़ौरतलब है कि राज्य विधानसभा में 60 सीटें हैं जिनमें से पाँच को छोड़कर बाक़ी सभी अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं.

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