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गुरुवार, 19 अक्तूबर, 2006 को 13:14 GMT तक के समाचार
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'पदोन्नति में आरक्षण सही'

भारत का सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 'क्रीमी लेयर' को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने का आदेश दिया है
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में सरकारी नौकरियों की पदोन्नतियों में अनुसूचित जाति और जनजातियों के लोगों को आरक्षण दिए जाने को सही ठहराया है.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि इन जातियों की 'क्रीमी लेयर' को इस तरह का कोई आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी को भी आरक्षण अनंत काल तक नहीं दिया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों की पदोन्नतियों में आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन को उचित ठहराया.

कोर्ट का कहना था कि राज्यों को इस तरह का आरक्षण देते समय स्पष्ट करना होगा कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है.

कोर्ट ने यह भी कहा है कि पदोन्नतियों में भी आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तक ही हो सकती है और किसी भी स्थिति में इससे अधिक आरक्षण न दिया जाए.

वकील संजय हेगड़े ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये मज़बूती प्रदान करने वाले प्रावधान हैं जिन्हें लागू करते समय विभिन्न कारणों को भी ध्यान में रखना होगा.

 पदोन्नतियों में भी आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तक ही हो सकती है और किसी भी स्थिति में इससे अधिक आरक्षण न दिया जाए
सुप्रीम कोर्ट

इनमें क्रीमी लेयर, पिछड़ापन, उचित प्रतिनिधित्व न होना और आरक्षण के कारण प्रशासनिक क्षमता में कमी नहीं आने जैसे लक्ष्यों को ध्यान में रखना ज़रुरी है.

क्रीमी लेयर

वर्ष 1992 में मंडल आयोग की सिफारिशों के आने के बाद सरकार 77वाँ संशोधन लेकर आई थी जिसके तहत अनुसूचित जाति और जनजातियों को उनकी स्थिति के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने का फ़ैसला किया गया था.

इस संशोधन के साथ-साथ 81वें, 82वें और 85 वें संशोधन को चुनौती दी गई थी, लेकिन कोर्ट ने अपने फ़ैसले में इन संशोधनों को सही ठहराया. बस 'क्रीमी लेयर' को अलग रखने की सलाह दी है.

महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने 'क्रीमी लेयर' के बारे में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ढाई लाख रूपये से अधिक की आमदनी वाले अनुसूचित जाति, जनजाति वाले 'क्रीमी लेयर' में होंगे लेकिन कई राज्यों में ऐसा कोई निर्देश नहीं है.

शायद यही कारण था कि कोर्ट ने कहा कि अगर कोई राज्य आरक्षण देने का फ़ैसला करता है तो उसे पिछड़ेपन और पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने संबंधी सही आकड़े भी जुटाने होंगे.

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