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'विदेशी विश्वविद्यालयों में भी आरक्षण' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि भारत में स्थापित होने वाले विदेशी विश्वविद्यालयों को भी आरक्षण के नियमों का पालन करना होगा. अर्जुन सिंह ने दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अगर कोई कानून भारतीय विश्वविद्यालय पर लागू होता है तो वो उसी रुप में विदेशी संस्थानों पर भी लागू होगा. ग़ौरतलब है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्गों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी विधेयक संसद के पिछले सत्र में पेश किया गया लेकिन कुछ आपत्तियों के मद्देनज़र अभी एक विशेष समिति इस पर विचार कर रही है. केंद्रीय शिक्षण संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) विधेयक के तहत सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में आरक्षण लागू होगा और साथ ही सामान्य वर्ग के हितों का ध्यान रखते हुए इस वर्ग की सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोत्तरी की जाएगी. मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा, "यहाँ के कानून का पालन तो करना ही होगा. कोई भी संविधान से उपर नहीं हो सकता." विदेशी निजी संस्थानों में अनुसूचित जाति और जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए फीस या प्रवेश शुल्क की कोई सीमा तय किए जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई प्रस्ताव अभी सामने नहीं आया है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'आरक्षण पर सरकार में मतभेद नहीं'17 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'आरक्षण का फ़ैसला नहीं बदलेगा'16 मई, 2006 | भारत और पड़ोस डॉक्टरों की हड़ताल से सेवाएं प्रभावित15 मई, 2006 | भारत और पड़ोस संसद में अपना पक्ष रखूँगा: अर्जुन सिंह30 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण मुद्दे पर फिर विवाद उठा08 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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