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डॉक्टरों का आरक्षण विरोधी प्रदर्शन टला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने अपना आंदोलन अगले कुछ महीनों के लिए रोकने की घोषणा कर दी है. एम्स रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता अनिल शर्मा ने कहा, "हम आंदोलन कुछ दिनों के लिए रोक रहे हैं क्योंकि विधेयक अब संसद की स्थायी समिति के पास है. हम अगले कुछ दिनों तक इस विधेयक को लेकर लोगों के बीच जाएँगे और अपनी बात रखेंगे." उधर जस्टिस पार्टी के नेता उदित राज का कहना था कि सरकार संसद में आधा अधूरा विधेयक लेकर आई है और 93 वें संशोधन के तहत उन संस्थानों में आरक्षण दिया जाना चाहिए जो गैर सरकारी हैं. आरक्षण समर्थक दलित डॉक्टर सुरेन्दर तोमर आर्य का कहना था, "आज हमें कोटा मिल रहा तो उच्च जाति के डॉक्टरों को बुरा लग रहा है. हम पिछले 60 साल से यातना झेल रहे हैं. ये तो कोई बात नहीं कि राजा का बेटा ही राजा बनेगा." उधर आरक्षण का विरोध कर रहे जेएनयू के एक उच्च जाति के छात्र गोपाल जी गोपाल का कहना था कि आरक्षण के ज़रिए उच्च जाति के लोगों के साथ अन्याय किया जा रहा है. उनका कहना था कि ब्राह्णण भी अब ग़रीब हो चुके हैं और झुग्गियों में रहने को मजबूर हैं क्या उन्हें आरक्षण नहीं मिलना चाहिए. आने वाले दिनों में जब तक यह विधेयक पारित नहीं होता, बहस चलती रहेगी. सवाल कई होंगे आरक्षण किसे दिया, क्यों दिया जाए और आखिरकार किस आधार पर दिया जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें 'अब और बातचीत करने की ज़रूरत नहीं'30 मई, 2006 | भारत और पड़ोस मेडिकल छात्रों की हड़ताल जारी30 मई, 2006 | भारत और पड़ोस चेतावनियों के बावजूद हड़ताल जारी31 मई, 2006 | भारत और पड़ोस दिल्ली में डॉक्टरों की हड़ताल ख़त्म31 मई, 2006 | भारत और पड़ोस हड़ताल तुरंत ख़त्म करें: सुप्रीम कोर्ट31 मई, 2006 | भारत और पड़ोस हड़ताली डॉक्टर काम पर लौटे01 जून, 2006 | भारत और पड़ोस स्वायत्तता बनाम राजनीतिक दखलंदाज़ी06 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'निजी क्षेत्र में आरक्षण उचित नहीं'28 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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