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गुरुवार, 06 दिसंबर, 2007 को 10:17 GMT तक के समाचार
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मोदी बयान पर वकील ने पल्ला झाड़ा

सोहराबुद्दीन और क़ौसर बी (फ़ाइल फ़ोटो)
सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में 13 पुलिस अधिकारियों पर आरोपपत्र दाख़िल हो चुका है.
सोहराबुद्दीन शेख़ फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान से नाराज़ सरकारी वकील केटीएस तुलसी ने तत्काल अपने आपको मुक़दमे की सुनवाई से अलग कर लिया है.

गुजरात सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पैरवी कर रहे केटीएस तुलसी ने सोहराबुद्दीन के मुठभेड़ को जायज़ ठहराने वाले मोदी के कथित बयान को अनुचित क़रार दिया है.

तुलसी ने नरेंद्र मोदी का स्पष्टीकरण न आने तक इस मामले की पैरवी करने से भी इनकार कर दिया है.

बीबीसी से बातचीत में तुलसी ने स्वीकार किया कि नरेंद्र मोदी के बयान का मामले पर कुछ असर पड़ सकता है.

तुलसी का कहना था कि ये मामला अदालत में विचाराधीन है और ऐसे समय में इस तरह का बयान देने का कोई मतलब समझ में नहीं आता है.

उनका मानना है कि इसके आधार पर पूरे मामले को गुजरात से बाहर स्थानांतरित करने की माँग भी उठ सकती है.

'अनुचित बयान

तुलसी ने कहा, “ये बयान बहुत अनुचित है. सरकार का जो हलफ़नामा है, जो रुख़ है, मुख्यमंत्री मोदी ने उसके विपरीत यह बयान दिया है.”

 जब तक मुख्यमंत्री से संतोषजनक जवाब नहीं आता है मेरे लिए इस मुक़दमे में सरकार की ओर से पेश होना मुश्किल है
केटीएस तुलसी

उन्होंने कहा कि इस बयान से सरकार की स्थिति काफी कठिन हो गई है.

यह पूछे जाने पर कि क्या मुख्यमंत्री का बयान अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है, उनका कहना था, "केस के बारे में कुछ नहीं कहा गया है इसलिए यह बयान अवमानना भले न हो लेकिन यह अनुचित अवश्य है."

तुलसी ने नरेंद्र मोदी के बयान के बाद कड़ा तेवर अपना लिया है. उन्होंने कहा कि मोदी की सफ़ाई आने तक वे इस मामले की पैरवी नहीं करेंगे.

उन्होंने कहा, “जब तक मुख्यमंत्री से संतोषजनक जवाब नहीं आता है मेरे लिए इस मुक़दमे में सरकार की ओर से पेश होना मुश्किल है.”

गुजरात सरकार से किसी तरह की सफ़ाई के सवाल पर तुलसी ने कहा कि उनका अभी तक किसी से संपर्क नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने जो बयान दिया है, वह उनकी अपनी सरकार की कार्रवाई के ख़िलाफ़ है. इससे सरकार की स्थिति बहुत विचित्र हो गई है.”

26 नवंबर, 2005 को गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और राजस्थान पुलिस के संयुक्त अभियान में सोहराबुद्दीन शेख़ मारे गए थे.

बाद में राज्य प्रशासन ने अदालत के समक्ष यह क़बूल किया था कि सोहराबुद्दीन के अलावा उनकी पत्नी क़ौसर बी की भी 'हत्या' हो गई है.

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