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कार्डिनल टोप्पो के बयान का विरोध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
असम में आदिवासियों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा के मामले में ईसाइयों के सबसे बड़े धर्म गुरु कार्डिनल तेलेस्फ़ोर पी टोप्पो के कथित बयान से झारखंड में राजनीति गरमा गई है. इसके विरोध में विभिन्न राजनीतिक दल जगह-जगह कार्डिनल के पुतले फूँक रहे हैं. कार्डिनल का बयान रांची के दो स्थानीय समाचार पत्रों में छपा था. बयान में कहा गया था कि अगर सरकार असम में रह रहे आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं देती तो झारखंड के गैर आदिवासियों को हटा कर उनकी जगह आदिवासियों को फिर यहीं बसाया जाएगा. एक जनजाति से तल्लुक रखने वाले कार्डिनल तेलेस्फ़ोर पी टोप्पो बृहस्पतिवार को ही रोम की यात्रा से रांची लौटे हैं. कार्डिनल का इंकार शुक्रवार को जब बीबीसी ने उनसे सम्पर्क किया तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई बयान उन्होंने नहीं दिया है. कार्डिनल टोप्पो ने कहा, "वह मेरा बयान नहीं है. ऐसी पत्रकारिता सही नहीं है. यह झूठ है क्योंकि मैंने किसी को धमकी नहीं दी. धमकी देना मेरा काम नहीं है और अधिकार भी नहीं है." उन्होंने कहा, "मैंने सिर्फ़ इतना ही कहा कि जो मुद्दा है उसका हल बातचीत से ही किया जा सकता है और इसे जल्दी हल किया जाना चाहिए."
उन्होंने कहा, "इस घटना से मैं मर्माहत हूँ क्योंकि असम में हिंसा का शिकार हुए आदिवासी हमारे अपने लोग हैं." उन्होंने कहा, "मैं नहीं समझ पा रहा हूँ कि जब भारत के संविधान में झारखंड में आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला है तो वह असम जाकर कैसे बदल जाएगा. मैं एक आदिवासी हूँ अगर मैं लंदन जाता हूँ तो क्या आदिवासी नहीं रह जाऊँगा?" कार्डिनल की उस कथित टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी आक्रामक मुद्रा में आ गई. पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष पशुपतिनाथ सिंह ने कार्डिनल के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला चलाने की मांग की. पशुपतिनाथ सिंह कहते हैं, "कार्डिनल का बयान काफ़ी दुखद है क्योंकि इससे राज्य की सामाजिक समरसता नष्ट हो जायेगी." उन्होंने कहा, "इससे पहले भी कई बार कई संवेदनशील मुद्दों पर कार्डिनल के इसी तरह के विवादास्पद बयान आ चुके हैं. वे एक धर्म गुरु हैं और उनको इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए."
कार्डिनल के बयान के विरोध में शुक्रवार को झारखंड छात्र युवा संगठन के कार्यकर्ता भी सड़क पर उतर आए. उन्होंने रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर कार्डिनल का पुतला भी जलाया. संगठन के उदय शंकर ओझा का कहना था कि कार्डिनल धर्म गुरु हैं और उन्हें सिर्फ़ धर्म से संबंधित बातें करनी चाहिए. असम में हुई हिंसा का झारखंड में विरोध जारी है. शुक्रवार को विभिन्न आदिवासी संगठनों ने रांची स्थित राज्य कांग्रेस मुख्यालय में जबरन प्रवेश कर सोनिया गाँधी का पुतला जलाया. आदिवासी महिलाओं ने भी आज अल्बर्ट एक्का चौक पर धरना देकर विरोध प्रकट किया. | इससे जुड़ी ख़बरें असम में 12 मज़दूरों की हत्या27 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस असम बंद के दौरान हिंसा, लोकसभा में हंगामा27 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस महिला से दुर्व्यवहार मामले में गिरफ़्तारी27 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस असम और झारखंड पूरी तरह बंद25 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस रैली में भड़की हिंसा में अनेक हताहत24 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस आदिवासियों की रैली के दौरान हिंसा24 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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