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'ख़तरा नहीं' हैं तालेबान: ब्रिटेन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटिश विदेश मंत्री लार्ड मलूच ब्राउन का कहना है कि तालेबान से अफ़गानिस्तान की सरकार को कोई गंभीर ख़तरा नहीं है. मलूच का यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि आधे से ज़्यादा अफ़गानिस्तान पर विद्रोहियों का नियंत्रण है. उस रिपोर्ट में कहा गया था कि अफ़गानिस्तान विभाजन की चुनौती से जूझ रहा है. पिछले साल की शुरुआत से ही ब्रिटिश और दूसरी अंतरराष्ट्रीय सेनाएँ दक्षिणी अफ़गानिस्तान में तालेबान के साथ भीषण संघर्ष में उलझी हुई हैं. "काफी प्रगति" ब्रिटिश सेना एक साल पहले हेलमंद प्रांत के मूसा क़ाला जैसै शहरों से हट गई थी, जिन पर फिर से कब्ज़ा नहीं किया जा सका है. हेलमंद के अलावा दूसरे आधे दर्जन प्रांतों में भी भारी संघर्ष चल रहा है. सीमा पार पाकिस्तान से रोज़ाना नए लड़ाकों की भर्ती कर रहा तालेबान और बड़े क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने में सक्षम है. "इंडिपेंडेंट" समाचारपत्र को लिखे पत्र में मलूच ने कहा है कि तालेबान फिर उठ खड़ा होने वाला संगठन नहीं है. मलूच ने कहा है कि इससे अफ़गानिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार को कोई बड़ा ख़तरा नहीं है. मलूच की यह प्रतिक्रिया अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक "सेनलिस" की पिछले सप्ताह जारी रिपोर्ट के मद्देनज़र आई है. "सेनलिस" की रिपोर्ट में कहा गया था कि अफ़गानिस्तान के अधिकांश इलाकों में तालेबान समानांतर सरकार चला रहे हैं. लार्ड मलूच ब्राउन ने कहा है कि वहाँ काफी प्रगति हुई है. हालाँकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि वहाँ चुनौतियाँ क़ायम हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें हेलमंद में '80 तालेबान लड़ाकों की मौत'28 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ ने सैनिकों को ही दोषी ठहराया12 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस ब्रितानी सैन्य बढ़त पर दुविधा28 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस शांति के लिए तालेबान की ज़रूरत25 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस तालेबान के ख़िलाफ़ व्यापक अभियान19 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस अपने 'तालेबानों' से लड़ता पाकिस्तान07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान समयचक्र - 109 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान का संघर्ष भरा इतिहास-209 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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