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अफ़ग़ानिस्तान समयचक्र - 1 | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान के इतिहास की प्रमुख घटनाओं पर एक नज़र - (पहला भाग) 1919 - ब्रितानी सेनाओं ने अफ़ग़ानिस्तान को अपने नियंत्रण में लाने की कोशिश की लेकिन अफ़ग़ानिस्तान ब्रितानी सेनाओं के साथ तीसरे युद्ध के बाद भी स्वतंत्र बना रहा. 1926 - अमानुल्लाह ने ख़ुद को राजा घोषित किया और कुछ सामाजिक सुधार लागू करने की कोशिश की लेकिन इन कोशिशों को परंपरावादी ताक़तों के विरोध का सामना करना पड़ा. 1929 - अमानुल्लाह के सुधारों की विरोध इस हद तक बढ़ा कि अशांति फैल गई जिसके बाद अमानुल्लाह को भागना पड़ा. सोवियत सेनाओं ने अमानुल्लाह को बहाल करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहीं. 1933 - ज़ाहिर शाह राजा बन गए और अफ़ग़ानिस्तान अगले चार दशकों तक राजतंत्र बना रहा. 1953 - जनरल मोहम्मद दाऊद प्रधानमंत्री बनते हैं. दाऊद ने आर्थिक और सैनिक मदद के लिए सोवियत संघ का रुख़ किया. अनेक सामाजिक सुधार शुरू किए जैसे कि पर्दा व्यवस्था को ख़त्म करना वग़ैरा. 1963 - मोहम्मद दाऊद को इस्तीफ़ा देने के लिए मज़बूर किया गया. 1964 - संवैधानिक राजतंत्र की शुरूआत होती है लेकिन उसके बाद राजनीतिक गुटबाज़ी और सत्ता संघर्ष शुरू हो जाता है. 1973 - मोहम्मद दाऊद बग़ावत करके सत्ता पर क़ाबिज़ हो जाते हैं और देश को एक गणराज्य घोषित कर देते हैं. सोवियत संघ के सहयोग को पश्चिमी ताक़तों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल करने की कोशिश की जिससे वामपंथी ताक़तें नाराज़ हो गईं और दाऊद के ख़िलाफ़ खड़ी हो गईं. 1978 - वामपंथी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने एक बग़ावत में जनरल दाऊद को सत्ता से हटा दिया और उनकी हत्या कर दी. लेकिन पार्टी ख़ल्क और परचम नाम के दो गुटों में बँट गई. उसी वक़्त उन कट्टरपंथी गुटों ने ख़ुद को संगठित करके ग्रामीण इलाक़ों में विद्रोह शुरू कर दिया जो सामाजिक सुधारों का विरोध करते रहे थे. 1979 - वामपंथी नेताओं हफ़ीज़ुल्लाह अमीन और नूर मोहम्मद तराकी के बीच सत्ता संघर्ष होता है जिसमें जीत अमीन की होती है. ग्रामीण इलाक़ों में विद्रोह जारी रहता है जिसमें अफ़ग़ान सेना की हार हो जाती है. आख़िरकार सोवियत संघ ने अमीन को सत्ता से हटाने के लिए सेनाएँ भेजीं. अमीन की हत्या कर दी जाती है. सोवियत हस्तक्षेप 1980 - बबराक करमाल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के परचम गुट के नेता थे, उन्हें सोवियत सेनाओं की मदद से गद्दी पर बिठाया जाता है. लेकिन सत्ता विरोध संघर्ष तेज़ होता गया और अनेक मुजाहिदन संगठन सोवियत सेनाओं से लड़ाई करने लगे. उन मुजाहिदीन को अमरीका, पाकिस्तान, चीन, ईरान और सऊदी अरब ने धन और हथियार दिए.
1985 - सोवियत सेनाओं के साथ संगठित मोर्चा खोलने के लिए मुजाहिदीन ने पाकिस्तान का रुख़ किया. उस लड़ाई में देश की क़रीब आधी आबादी विस्थापित हुई जिनमें से बहुत से लोगों ने ईरान और पाकिस्तान में पनाह ली. नए सोवियत नेता मिख़ाइल गोर्बाच्योफ़ ने कहा कि वह अफ़ग़ानिस्तान से अपनी सेनाएँ हटा लेंगे. 1986 - अमरीका ने मुजाहिदीन को स्टिंगर मिसाइल देना शुरू किया जिनसे सोवियत सेनाओं के हेलीकॉप्टरों को निशाना बनाया जा सकता था. बबराक कमराल की जगह नजीबुल्लाह को उस सोवियत समर्थित शासन का मुखिया बनाया जाता है. 1988 - अफ़ग़ानिस्तान, सोवियत संघ, अमरीका और पाकिस्तान के बीच शांति समझौता होता है और सोवियत संघ ने अपनी सेनाएँ हटाना शुरू कर दिया. 1989 - मई में सोवियत संघ की सेनाएँ पूरी तरह से हट गईं लेकिन गृह युद्ध जारी रहा और मुजाहिदीन ने नजीबुल्लाह को हटाने के लिए अपनी गतिविधियाँ तेज़ कर दीं. 1991 - अमरीका और सोवियत संघ में सहमति होती है कि किसी भी पक्ष को सैन्य सहायता नहीं दी जाएगी. मुजाहिदीनों की जीत 1992 - विद्रोह काबुल के नज़दीक पहुँच जाता है और नजीबुल्ला को सत्ता से हटना पड़ता है. एक दिन वह खंबे से लटके हुए पाए जाते हैं. विद्रोही मुजाहिदीन का प्रभाव बढ़ता है. 1993 - विद्रोही मुजाहिदीन के बीच एक सरकार के गठन पर सहमति होती है और ताजिक नेता बुरहानुद्दीन रब्बानी के नेतृत्व सरकार का गठन होता है. 1994 - विद्रोही लड़ाई जारी रहती है और पश्तून प्रभाव वाले तालेबान का उदय एक ताक़तवर गुट के रूप में होता है जो रब्बानी सरकार के लिए बड़ी चुनौती पेश करते हैं. 1996 - तालेबान काबुल में सत्ता हथिया लेते हैं और इस्लाम के कुछ कट्टर प्रावधानों का लागू करते हैं. इनमें महिलाओं को काम करने से रोकना और इस्लामी क़ानून-व्यवस्था को लागू करना शामिल था. बुरहानुद्दीन रब्बानी काबुल से भागकर तालेबान विरोधी गुट नॉर्दर्न अलायंस में शामिल हो जाते हैं. तालेबान पर दबाव 1997 - पाकिस्तान और सऊदी अरब तालेबान के शासन को मंज़ूरी देते हैं. बाक़ी अधिकतर देशों ने रब्बानी सरकार को ही मान्यता जारी रखी. अब तक तालेबान ने देश के दो-तिहाई हिस्से पर क़ब्ज़ा कर लिया.
1998 - भीषण भूकंप में हज़ारों लोगों की जानें चली जाती है. अमरीका ने ओसामा बिन लादेन के संदिग्ध ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. ओसामा पर अफ्रीका में अमरीकी दूतावास पर बम हमला करने का संदेह था. 1999 - संयुक्त राष्ट्र हवाई उड़ानों पर प्रतिबंध और आर्थिक पाबंदियाँ लगाता है. ऐसा अफ़ग़ानिस्तान पर दबाव बनाने के लिए किया कि वह ओसामा बिन लादेन को सौंप दे ताकि उन पर मुक़दमा चलाया जा सके. 2001 - जनवरी - संयुक्त राष्ट्र तालेबान पर कुछ और पाबंदियाँ लगाता है. 2001 - मार्च - तालेबान बामियान में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा को तोड़ देता है जबकि उस प्रतिमा को एक धरोहर के रूप में संरक्षित करने के लिए प्रयास किए जा रहे थे. 2001 - अप्रैल - तालेबान के सुप्रीम कमांडर मुल्ला मोहम्मद उमर के बाद दूसरे बड़े नेता मुल्ला मोहम्मद रब्बानी की कैंसर से मौत हो जाती है. 2001 - मई - तालेबान ने धार्मिक अल्पसंख्यकों को आदेश दिया के वे ऐसी पट्टी बाँधें जिसपर ग़ैरमुस्लिम लिखा गया हो. हिंदू महिलाओं को भी अन्य अफ़ग़ान महिलाओं की तरह ही बुर्क़ा पहनने आदेश दिया गया. 2001 - सितंबर - आठ विदेशी सहायताकर्मियों पर ईसाइयत को बढ़ावा देने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट में मुक़दमा चलाया जाता है जिससे तालेबान और सहायता एजेंसियों के बीच महीनों तक तनाव रहता है. 2001 - तालेबान के मुख्य विपक्षी गुट के नेता और गुरिल्ला लड़ाका अहमद शाह मसूद की हत्या हो जाती है. उनकी हत्या संभवतः ऐसे लोगों ने की जिन्होंने ख़ुद को पत्रकार बताया. 2001 - अक्तूबर - तालेबान ने ओसामा बिन लादेन को सौंपने से इनकार कर दिया जिसके बाद अमरीका और ब्रिटेन ने अफ़ग़ानिस्तान पर हमला कर दिया. शुरू में हवाई हमले किए गए. अमरीका ओसामा बिन लादेन को 11 सितंबर के हमलों का ज़िम्मेदार बताता है. 2001 - नवंबर - विपक्षी सेनाओं ने मज़ारे शरीफ़ पर क़ब्ज़ा कर लिया और कुछ दी दिन बाद काबुल और अन्य शहरों पर भी उनका क़ब्ज़ा हो गया. |
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