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शुक्रवार, 28 सितंबर, 2007 को 09:47 GMT तक के समाचार
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ब्रितानी सैन्य बढ़त पर दुविधा
जनरल डैन मैकनील
अफ़ग़ानिस्तान में नैटो सेनाओं के कमांडर डैन मैकनील ने आगाह किया है कि ब्रितानी सेनाओं को उस क्षेत्र को अगले साल लड़ाई के ज़रिए फिर हासिल करना पड़ सकता है जो उन्होंने पिछली गर्मियों में हासिल कर लिया था.

जनरल डैन मैकनील ने कहा है कि नैटो गठबंधन सेनाओं ने हेलमंद प्रांत में पिछले छह महीनों के दौरान ख़ासी कामयाबी हासिल की है जो सैन्य नज़रिए से बहुत अहम है.

लेकिन डैन मैकनील ने चिंता भी ज़ाहिर की कि तालेबान आगामी सर्दियों के दौरान ख़ुद को फिर से संगठित कर सकते हैं इसलिए अफ़ग़ान सैनिकों को उस क्षेत्र की सुरक्षा संभालना मुश्किल काम साबित हो सकता है.

पिछले क़रीब छह महीने के दौरान हेलमंद प्रांत में हुई लड़ाई में सैकड़ों तालेबान के अलावा 25 ब्रितानी सैनिक भी मारे जा चुके हैं.

हेलमंद में पिछले छह महीनों के दौरान नैटो गठबंधन सेनाओं की रणनीति यह रही है कि तालेबान को उन इलाक़ों से पीछे धकेला जाए जहाँ उन्होंने अपने मज़बूत इलाक़े बना रखे हैं और इस कोशिश में ब्रितानी सैनिकों को भीषण लड़ाई का सामना करना पड़ा है.

रणनीति

बीबीसी संवाददाता एलेस्टेयर लीथहैड के साथ ख़ास बातचीत में जनरल डैन मैकनील ने कहा है कि यह एक कामयाब रणनीति रही है लेकिन उन इलाक़ों पर अपना क़ब्ज़ा बनाए रखना अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा बलों के लिए बहुत मुश्किल काम होगा.

जनरल डैन मैकनील ने कहा कि हो सकता है जिन इलाक़ों पर पिछली गर्मियों में क़ब्ज़ा हो चुका है उन्हें सर्दियों के बाद अगले साल फिर से हासिल करने की ज़रूरत आन पड़े क्योंकि तालेबान सर्दियों में ख़ुद को फिर से संगठित करके उन स्थानों को हासिल कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, "इसकी बहुत संभावना है क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान के सुरक्षा बल उतने मज़बूत साबित नहीं हुए हैं जितनी हमने उम्मीद की है. हमें अपना ऐसा कुछ काम फिर से करना पड़ सकता है जो हम पहले ही कर चुके हैं."

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ब्रितानी सैनिक कुछ इलाक़ों पर क़ब्ज़ा करके पीछे हट गए हैं और वहाँ पर अफ़ग़ानिस्तान के सुरक्षा बलों को क़ब्ज़ा बनाए रखने की ज़िम्मेदारी सौंप दी है लेकिन वो क़ब्ज़ा बनाए रखना ख़ासा मुश्किल नज़र आता है.

तालेबान अक्सर छापामार युद्ध रणनीति अपनाते हैं, मसलन सड़क किनारे बम विस्फोट करना जिससे अंतरराष्ट्रीय सेनाओं का भरोसा हिलता है.

अफ़ग़ा सेना और पुलिस को इस स्तर तक प्रशिक्षित करना अब विदेशी सेनाओं की ज़िम्मेदारी है कि वे देश की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से संभाल सकें और जब वो स्तर हासिल हो जाएगा तभी विदेशी सेनाएँ देश से बाहर निकलने के विकल्प पर विचार कर सकती हैं.

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