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'अधिकतर आत्मघाती हमलावर विदेशी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आत्मघाती हमलों पर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान में आत्मघाती हमलावरों में आधे से ज़्यादा वहाँ के नागरिक नहीं हैं. अफ़गानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र ने एक सर्वेक्षण के बाद यह भी कहा है कि 80 प्रतिशत से भी अधिक आत्मघाती हमलावरों को या तो पाकिस्तान में चुना गया या उन्हें वहाँ प्रशिक्षण दिया गया या फिर वहाँ शरण दिया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि दो सालों में हमलों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. अफ़ग़ानिस्तान में छह साल पहले हुए आत्मघाती हमले की बरसी पर संयुक्त राष्ट्र ने यह रिपोर्ट जारी की है. इस आत्मघाती हमले में अहमद शाह मसूद को मार दिया गया था. लेकिन वर्ष 2005 में आत्मघाती हमले सामान्य सी बात हो गए जब तालेबानों ने हमलों के लिए इसका उपयोग करना शुरु किया. पिछले साल अफ़गानिस्तान में कुल 123 आत्मघाती हमले हुए थे और इस साल अगस्त तक ऐसे हमलों की संख्या 103 हो चुकी थी. इस साल के पहले छह महीनों में 193 लोगों की मौत हो गई, जिसमें 121 अफ़ग़ान नागरिक थे, 62 अफ़ग़ान सुरक्षा कर्मी थे और 10 विदेशी सैनिक. तरह-तरह के हमलावर रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ान लोगों को यह स्वीकार करना होगा कि उनके अपने देश के नागरिक ही ये हमले कर रहे हैं. इससे पहले अफ़ग़ान नेताओं ने कहा था कि अफ़ग़ान लोग आत्महत्या नहीं करते. हालांकि संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि आधे से अधिक हमलावर विदेशी होते हैं और वे मुख्य रुप से पाकिस्तान से आते हैं. इसके अलावा वे अरब और मध्य एशिया से आते हैं.
हमलावर बनने वाले अफ़ग़ान वो होते हैं जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा भाग पाकिस्तान के शरणार्थी शिविरों में बिताया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान के आत्मघाती हमलावर कई मायनों में दुनिया के दूसरे हमलावरों से अगल होते हैं. वे ग़रीब होते हैं और बहुत कम शिक्षित होते हैं. उनकी शिक्षा ज़्यादातर पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े में हुई होती है. एक तो इन हमलावरों में से कोई महिला नहीं होती और हमलावर हमलों से पहले अपने परिवार के लिए कोई संदेश भी नहीं छोड़ते. दरअसल कई परिवारों को तो पता भी नहीं होता कि उनका बेटा आत्मघाती हमलावर बनकर मारा जा चुका है. नाराज़गी इस रिपोर्ट के लेखकों ने ऐसे 20 लोगों से बातचीत की, जो आत्मघाती हमलों में विफल हो चुके थे. इनमें 15 साल का नौजवान भी था और 50 साल का अधेड़ भी. कुछ लोगों ने कहा कि उनसे कहा गया था कि विस्फोट में वे मारे नहीं जाएँगे और विस्फोट के बाद उन्हें पैसे मिलेंगे. लेकिन कुछ दूसरे लोग अपनी मर्ज़ी से आत्मघाती हमलावर बने थे. वे अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी फ़ौजों की मौजूदगी से नाराज़ थे. वे मानते हैं कि जो अफ़ग़ान नागरिक मारे जा रहे हैं उसका कारण अफ़ग़ान सरकार का भ्रष्टाचार है. बहुत से लोगों ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि इन हमलों में आम नागरिक मारे जा रहे हैं लेकिन हमलावरों ने कहा कि ऐसे लोग स्वर्ग जाएँगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोई 10 फ़ीसदी अफ़ग़ान मानते हैं कि ऐसे हमले हमेशा न्यायोचित होते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें काबुल हवाईअड्डे पर आत्मघाती हमला31 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस कंधार में आत्मघाती हमला, 15 मरे18 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस आत्मघाती हमले में दस मारे गए15 जून, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में विस्फोट, छह मरे22 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस जवाबी अमरीकी हमले 'अत्यधिक' हिंसक15 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'आत्मघाती' हमले में 10 मारे गए23 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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