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बुधवार, 28 नवंबर, 2007 को 09:35 GMT तक के समाचार
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किपलिंग का जन्म स्थल बनेगा संग्रहालय

रुडयार्ड किपलिंग
प्रसिद्ध लेखक किपलिंग ने अपना बचपन इसी मकान में गुजारा था
अंग्रेजी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक और कवि रुडयार्ड किपलिंग के जन्म स्थान मुंबई में उनके घर को कला संग्रहालय में तब्दील किया जाएगा.

इस योजना को वर्ष 2009 तक पूरा करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक समिति गठित की है.

किपलिंग मुंबई के जिस घर में जन्मे थे वो अब मुंबई के जाने माने कला विद्यालय जे जे स्कूल ऑफ़ आर्ट्स के परिसर में है.

लकड़ी और पत्थर से बनी यह दो मंजिला इमारत 100 सालों से भी पुरानी है, लेकिन समय के थपेड़ों का इस पर ज्यादा असर नहीं दिखता.

वर्ष 1850 से लेकर अब तक के समकालीन पेंटिंग का बड़ा ख़ज़ाना इस कला विद्यालय के पास है जो बनने वाले संग्रहालय का हिस्सा होगा.

 यह हमारे तरफ़ से एक प्रसिद्ध लेखक के लिए श्रद्धांजलि है जिनका जन्म मुंबई में हुआ था
जे जे स्कूल ऑफ़ आर्ट्स में स्थापत्य के शिक्षक, विकास दिलावरी

इस संग्रहालय में 'जंगल बुक' जैसी कहानी और 'इफ़' जैसी बेहतरीन कविता के लेखक किपलिंग से जुड़ी हुई कुछ वस्तुएँ होंगी. संग्रहालय में एक कमरा 'किपलिंग रूम' के नाम से अलग से बनाया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी साहित्य के लिए नोबल का पुरस्कार सबसे पहले किपलिंग को ही मिला था.

श्रद्धांजलि

जे जे स्कूल ऑफ़ ऑर्ट्स में स्थापत्य के शिक्षक विकास दिलावरी कहते हैं कि 30 दिसम्बर 1865 को जन्मे किपलिंग के घर को देखने विदेशी पर्यटक आते रहते हैं. वे कहते हैं कि संग्रहालय में तब्दील होने के बाद किपलिंग के जन्म स्थान देखने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होगी.

विकास दिलावरी कहते हैं, "यह हमारे तरफ़ से एक प्रसिद्ध लेखक के लिए श्रद्धांजलि है जिनका जन्म मुंबई में हुआ था."

कला प्रेमी संगीता जिंदल कहती हैं कि मुंबई के लोगों के लिए गर्व की बात है कि एक अंतरराष्ट्रीय ख़्याति प्राप्त लेखक की स्मृतियाँ इस शहर से जुड़ी हुई हैं.

वे कहती हैं, "किपलिंग बचपन में ही इंग्लैंड चले गए थे लेकिन वे मुबंई कभी नहीं भूले और मुंबई को विश्व का सबसे ख़ूबसूरत शहर कहते रहे."

वर्ष 1865 में ही किपलिंग के पिता जॉन लॉकवुड कला विद्यालय के डीन नियुक्त हुए थे. महज़ छह वर्ष तक ही किपलिंग मुंबई में रहे, उसके बाद उनके पिता ने उन्हें पढ़ाई के लिए इंग्लैंड भेज दिया था.

जॉन लॉकवुड ने कला और स्थापत्य के क्षेत्र में काफ़ी नाम कमाया था. 19 सदी के मुंबई में कई इमारतें उनकी स्थापत्य कला से प्रेरित रही हैं.

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