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आईएईए से बातचीत को हरी झंडी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में वाम दलों ने सरकार को अमरीका के साथ परमाणु सहमति पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से आधिकारिक तौर पर बातचीत करने के लिए हरी झंडी दे दी है. भारत-अमरीका परमाणु सहमति पर चर्चा के लिए गठित वाम दलों और सत्तारूढ़ यूपीए सरकार की समिति की शुक्रवार को छठी बैठक में वाम दलों ने कहा कि सरकार आईएईए के साथ बातचीत कर सकती है लेकिन इस बातचीत के नती़जों को अंतिम रूप देने से पहले समिति के सामने पेश करना होगा. विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने इस बैठक के बाद कहा कि अब सरकार आईएईए के साथ बातचीत करेगी और बातचीत के सारांश को इस समिति में पेश किया जाएगा और उन पर विचार के बाद ही कोई फ़ैसला लिया जाएगा. समिति ने अमरीकी संसद में पारित हाइड एक्ट के भारत की विदेश नीति और सुरक्षा मामलों पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चर्चा की. यह निर्णय लिया गया कि हाइड एक्ट और आईएईए के सुरक्षा संबंधी उपायों पर 123-समझौते के प्रावधानों के प्रभाव की भी जांच की जानी चाहिए. समिति में कहा गया कि भारत से संबंधित सुरक्षा उपायों के समझौते के मसौदे को तैयार करने के लिए आईएईए सचिवालय के साथ बातचीत की ज़रूरत होगी. भारत-अमरीका परमाणु सहमति को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार को आईएईए के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करना ज़रूरी है. इससे पहले वाम दलों ने सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि सरकार आईएईए के साथ भारत के विशेष समझौते पर चर्चा शुरू करती है तो वे सरकार से समर्थन वापस ले सकते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'परमाणु समझौता आगे बढ़ाना चाहिए'30 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना परमाणु सहमति : अमरीकी सांसद चिंतित03 मई, 2007 | पहला पन्ना भारत-अमरीका परमाणु समझौता मंज़ूर09 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना परमाणु समझौते के मसौदे पर सहमति08 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना समझौता और बुश प्रशासन का अंतर्द्वंद्व 17 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना मनमोहन सिंह-जॉर्ज बुश की मुलाक़ात17 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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