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बेनज़ीर की 'नज़रबंदी' ख़त्म | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता बेनज़ीर भुट्टो को 'नज़रबंद' रखने का आदेश वापस ले लिया गया है. उन्हें रिहा कर दिया गया है. अमरीका ने इसका स्वागत करते हुए कहा है कि पाकिस्तान में सभी उदारवादी पक्षों को एकजुट होकर लोकतंत्र की बाहली के लिए काम करना चाहिए. बेनज़ीर भुट्टो शुक्रवार को रावलपिंडी में एक रैली को संबोधित करने वाली थीं और उसके लिए जैसे ही अपने इस्लामाबाद स्थित मकान से रावलपिंडी के लिए निकलीं तो उन्हें नज़रबंदी का नोटिस दिया गया. अमरीका ने पाकिस्तानी शासन के इस क़दम की निंदा की थी और कहा था कि बेनज़ीर को 'आवाजाही की आज़ादी' मिलनी चाहिए. बेनज़ीर भुट्टो ने इस नज़रबंदी नोटिस को ग़ैरक़ानूनी बताया था. उन्होंने दो बार सुरक्षा घेरे को तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की मगर सुरक्षा बलों ने उन्हें वापस घर में भेज दिया. इस मौक़े पर बेनज़ीर भुट्टो और उनके समर्थकों की सुरक्षा बलों के साथ काफ़ी धक्का-मुक्की भी हुई. शहर में जगह-जगह पुलिस की तैनाती कर दी गई. ग़ौरतलब है कि इमरजेंसी के दौरान बड़ी रैलियों पर पाबंदी लगा दी गई है. 'नज़रबंदी' का आदेश मिलने के बाद बेनज़ीर भुट्टो के इस्लामाबाद स्थित घर को पुलिस की बख़्तरबंद गाड़ियों ने घेर लिया. इससे पहले हालाँकि पाकिस्तान के सूचना मंत्री तारिक़ अज़ीम ख़ान ने बीबीसी से कहा था कि बेनज़ीर भुट्टो को नज़रबंद नहीं किया गया है. तारिक़ अज़ीम ख़ान का कहना था कि उनके घर को बेनज़ीर भुट्टो की सुरक्षा के लिए ही घेरा गया है. बेनज़ीर ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने पर मजबूर करने के लिए एक अभियान चलाने का ऐलान किया है. हालांकि इमरजेंसी के ख़िलाफ़ होने जा रही इस रैली के लिए प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी लेकिन बेनज़ीर भुट्टो ने कहा था कि रैली सरकारी रोक के बाद भी निकलेंगी. उधर पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों ने रावलपिंडी जाने वाली सारी सड़कों को बंद कर दिया है और उस मैदान को घेर लिया है जहाँ पीपीपी की रैली होने वाली थी. इस बीच पीपीपी ने दावा किया है कि पुलिस ने घरों पर छापे मारकर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया है. पार्टी ने इनकी संख्या हज़ारों में होने का दावा किया है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि रावलपिंडी में जहाँ रैली निकलनी थी वहाँ बहुत कम कार्यकर्ता दिखाई दिए हैं. गिरफ़्तारियाँ रावलपिंडी में रैली की घोषणा के बाद गत बुधवार की रात से ख़बरें आने लगीं थीं कि पुलिस ने पीपीपी के कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार करना शुरू किया है.
गुरुवार को बेनज़ीर भुट्टो और उनकी पार्टी के प्रवक्ता ने दावा किया था कि हज़ारों कार्यकर्ताओं को उनके घरों पर छापा मारकर गिरफ़्तार कर लिया गया है. बीबीसी संवाददाता ऐजाज़ मेहर का कहना है कि रावलपिंडी और आसपास के शहर, चकवाल, झेलम और अटक आदि से पीपीपी के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पकड़ा है. प्रशासन ने रैली की अनुमति न देने के पीछे चरमपंथी हमलों की आशंका जताई थी और कहा था कि ख़ुफ़िया रिपोर्ट के अनुसार पंजाब प्रांत में सात-आठ आत्मघाती हमलावर घुस आए हैं. इसका जवाब देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि जब प्रांतों के मुख्यमंत्री और मंत्री रैलियाँ और जनसभाएँ कर सकते हैं और उन पर हमला नहीं होता तो फिर पीपीपी की रैली भी हो सकती है. उनका कहना था कि दरअसल यह प्रशासन की ओर से लोकतंत्र चाहने वालों को रोकने की कोशिश है. घोषणा ख़ारिज की दूसरी ओर बेनज़ीर भुट्टो ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की 15 फ़रवरी तक चुनाव कराए जाने की घोषणा को ख़ारिज कर दिया.
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से चुनाव की निश्चित तारीख़ की घोषणा करने की माँग की. साथ ही उन्होंने अगामी गुरुवार तक परवेज़ मुशर्रफ़ से सेना प्रमुख का पद छोड़ने को कहा. बेनज़ीर का कहना था कि ये घोषणा आपातकाल के ख़िलाफ़ विपक्ष के आंदोलन को कमज़ोर करने के लिए की गई है. इसके पहले राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने 15 फ़रवरी से पहले चुनाव कराने की घोषणा की. परवेज़ मुशर्रफ़ ने पीटीवी से कहा, " ये मेरा वादा था और मैं इसे पूरा करने जा रहा हूँ." मुशर्रफ़ की इस घोषणा से ठीक पहले अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने इमरजेंसी लगने के बाद उनसे पहली बार फ़ोन पर बात की थी. बुश ने कहा था कि वे जल्द से जल्द चुनाव करवाएँ और सेनाध्यक्ष का पद छोड़ दें. पीटीवी ने बताया है कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने राष्ट्रपति के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरूआत से पहले वर्दी उतार देने का अपना वादा दोहराया है लेकिन इसके लिए उन्होंने कोई तारीख़ या समयसीमा नहीं तय की है. |
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