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झारखंड नरसंहार में नामज़द प्राथमिकी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड पुलिस ने गिरिडीह ज़िले के चिल्कारी गाँव में शुक्रवार की आधी रात के बाद हुए नरसंहार के सिलसिले में दस माओवादियों के खिलाफ नामज़द प्राथमिकी (एफ़आईआर) दर्ज की है. यह प्राथमिकी झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के भाई नुनुलाल मरांडी के अंगरक्षक के बयान के आधार पर दर्ज की गई है. नुनुलाल मरांडी 27 अक्तूबर को गिरिडीह के चिल्कारी गाँव में आयोजित किए गए जनजातीय फ़ुटबाल मैच के पुरस्कार वितरण समारोह में शामिल थे जिस पर माओवादियों ने धावा बोला था और अंधाधुंध गोलियाँ चलाई थीं. माओवादियों के हमले में बाबूलाल मरांडी के छोटे पुत्र अनूप मरांडी सहित 18 ग्रामीणों के मृत्यु हो गई थी. झारखंड पुलिस के महानिरीक्षक बीबी प्रधान ने कहा कि हमला करने वाले माओवादियों के दस्ते की पहचान कर ली गई है. एफ़आईआर में कहा गया है कि माओवादियों के दस्ते का नेतृत्व जीतन मरांडी कर रहा था जिसने सबसे पहले अपनी बंदूक से गोली चलाई थी. पुलिस ने दावा किया है कि शिनाख्त किए गए माओवादियों की गिरफ्तारी के लिए सघन अभियान चलाया जा रहा है. इस बीच जीतन मरांडी ने किसी अज्ञात स्थान से बीबीसी से संपर्क कर प्राथमिकी में दर्ज आरोपों का खंडन किया है. जीतन मरांडी का कहना है कि वे एक संस्कृतिकर्मी हैं और झारखंड एवन नामक अपना संगठन चलाते हैं जिसकी माओवादियों से किसी भी तरह की संबद्धता नहीं है. जीतन का कहना था कि घटना के समय वह अपने गांव में थे जो घटनास्थल से 100 किलोमीटर दूर स्थित है. "पुलिस मुझे जान-बूझकर फँसा रही है." हालाँकि पुलिस के अधिकारियों का कहना है की पुख्ता सबूत के आधार पर ही प्राथमिकी दर्ज की गई है. नुनुलाल मरांडी के घायल अंगरक्षक ने जीतन मरांडी को पहचान लिया था. पुलिस ने फिलहाल झारखंड और बिहार की सीमा को सील कर दिया है और अर्द्धसैनिक बालों के साथ मिलकर सघन अभियान चला रखा है. अभियान में अभी तक कोई सफलता नहीं मिल पाई है. | इससे जुड़ी ख़बरें महतो हत्याकांड में ग्रामीणों से पूछताछ10 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस महतो हत्याकांड मामले में गिरफ्तारियां13 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादियों के बंद से जनजीवन प्रभावित20 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस दो नक्सली गुटों में भिड़ंत, आठ मरे09 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादियों के बंद का झारखंड में असर26 जून, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादियों ने झारखंड को ठप्प किया27 जून, 2007 | भारत और पड़ोस झारखंड में दो रेलवे स्टेशनों में धमाके01 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस झारखंड में चरम पर नक्सलवाद27 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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