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रविवार, 28 अक्तूबर, 2007 को 01:29 GMT तक के समाचार
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मुठभेड़ में तीन माओवादी मारे गए

झारखंड बंद
झारखंड में आए दिन नक्सली हमले होते रहे हैं
नक्सली हमले के विरोध में बुलाए गए झारखंड बंद का व्यापक असर दिखा. लोहरदगा में पुलिस के साथ मुठभेड़ में तीन माओवादी मारे गए.

सड़कों पर सार्वजनिक वाहन नहीं चले और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे.

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार की देर रात माओवादी हमले में झारखंड विकास पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के पुत्र अनूप मरांडी समेत 18 लोग मारे गए थे.

इसी घटना के विरोध में बंद का आह्वान किया गया था.

झारखंड पुलिस के प्रवक्ता आरके मलिक ने बताया कि लोहरदगा के ग्रामीण इलाक़े में पुलिस और माओवादियों के बीच कई घंटों तक मुठभेड़ जारी रही जिसमें तीन माओवादी मारे गए.

इससे पहले शनिवार रात लातेहार ज़िले में माओवादियों ने पाँच लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी.

बंद के दौरान सुबह से ही सार्वजनिक वाहन सड़कों से नदारत दिखे. असर रेल यातायात पर भी पड़ा. कुछ जगहों पर रेलवे लाइन पर धरना देने से दिल्ली से झारखंड होकर गुजरने वाली तीन राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा.

बंद का आह्वान झारखंड विकास मोर्चा ने किया था जिसके नेता बाबूलाल मरांडी हैं. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने बंद को अपना समर्थन दिया.

राजधानी राँची में बंद समर्थकों ने कुछ स्थानों पर ज़बरन दुकानें बंद कराने की कोशिश की.

नक्सली हमले से आक्रोशित लोगों ने राज्य सरकार का पुतला भी फूँका.

बंद के मद्देनज़र राज्यभर में सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए थे.

हमला

मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने शुक्रवार की घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को एक-एक लाख रूपए का मुआवजा और परिवार के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है.

झारखंड राज्य के गठन के सात वर्षों में राज्य के 24 में से 18 ज़िले नक्सल प्रभावित हैं.

क़रीब दो साल पहले गिरिडीह में ही माओवादियों ने 17 ग्रामीणों की यह कहते हुए हत्या कर दी थी कि ये ग्रामीण नागरिक संघर्ष समिति के सदस्य हैं जो माओवादियों के ख़िलाफ पुलिस को सूचना देते हैं.

कुछ ही समय पहले राज्य के सिंहभूम ज़िले में माओवादियों ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता सुनील महतो की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

पुलिस का कहना है कि बाबूलाल मरांडी और उनका पूरा परिवार पहले से ही माओवादियों की हिटलिस्ट में है और आमतौर पर इन लोगों को किसी गाँव में ठहरने की सलाह नहीं दी जाती.

बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री थे और पहले भारतीय जनता पार्टी में थे.

बाद में उन्होंने भाजपा छोड़ दी थी और झारखंड विकास मोर्चा नाम की पार्टी बना ली थी.

वे इस समय कोडरमा से निर्दलीय सांसद भी हैं.

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