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बुधवार, 24 अक्तूबर, 2007 को 11:44 GMT तक के समाचार
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दिल्ली के 10 पुलिसवालों को उम्रक़ैद
भारतीय पुलिस
फ़र्जी मुठभेड़ के इस मामले में निचली अदालत का फ़ैसला आने में दस साल लग गए
दिल्ली की एक अदालत ने 1997 कनॉट प्लेस में फ़र्जी मुठभेड़ मामले के दोषी पूर्व एसीपी सतवीर राठी समेत 10 पुलिसकर्मियों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार ने बुधवार को अपने फ़ैसले में कहा, "मैं इन्हें उम्र क़ैद की सज़ा देता हूँ."

आजीवन कारावास पाने वाले पुलिसकर्मियों में तत्कालीन एसीपी सतवीर राठी के अलावा, एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर, तीन हेड कांस्टेबल और चार कांस्टेबल हैं.

अदालत ने इन पुलिसकर्मियों को मार्च 1997 में कनॉट प्लेस में फ़र्जी मुठभेड़ में हरियाणा के दो व्यापारियों प्रदीप गोयल और जगजीत सिंह को मारने का दोषी क़रार दिया था.

बहस

समाचार एजेंसियों के अनुसार इससे पूर्व, अभियोजन पक्ष केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के वकील एसके सक्सेना ने हेड कांस्टेबल महावीर सिंह और कांस्टेबल कोठारी राम को सज़ा-ए-मौत देने की माँग की.

अदालत ने पाया है कि इन पुलिसकर्मियों की गोलियों से ही ये व्यापारी मारे गए थे.

 मैं इन्हें उम्र क़ैद की सज़ा देता हूँ
विनोद कुमार, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश

इसके अलावा सीबीआई के वकील ने इस ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे तत्कालीन एसीपी राठी को भी मृत्युदंड देने की माँग की थी.

सज़ा पर बहस के दौरान अभियोजक ने कहा, "सभी दोषी पुलिसकर्मी थे और उनसे क़ानून की रक्षा की उम्मीद की जाती है लेकिन उन्होंने कार में सवार निहत्थे लोगों पर 34 राउंड गोलियाँ चलाई जो कि अपराध की जघन्यता दर्शाता है."

हालाँकि सीबीआई ने बाक़ी सात दोषियों को मृत्यु दंड देने की माँग नहीं की.

31 मार्च 1997 को पूर्वी दिल्ली से कनॉट प्लेस जा रहे दो व्यापारियों जगजीत सिंह और प्रदीप गोयल की राठी के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की टीम ने 'फ़र्जी मुठभेड़' में हत्या कर दी थी.

सीबीआई ने इस मामले में जून 1997 में एसएस राठी और नौ अन्य पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ हत्या, हत्या का प्रयास और अन्य धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किए.

 दोषी पुलिसकर्मियों ने कार में सवार निहत्थे लोगों पर 34 राउंड गोलियाँ चलाई, जो कि अपराध की जघन्यता बताता है
अभियोजन पक्ष

सभी अभियुक्तों को अदालत में पेश किया गया और सितंबर 1998 में अदालत ने अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय कर दिए.

करीब साढ़े तीन साल जेल में गुज़ारने के बाद राठी और दूसरे अभियुक्तों को ज़मानत मिल गई थी.

आरोप

आरोप पत्र के अनुसार अपराध शाखा के एसीपी राठी और अन्य 9 पुलिसकर्मियों ने उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर मोहम्मद यासीन को गिरफ़्तार करने की योजना बनाई थी.

पुलिस को पता चला कि 31 मार्च 1997 को यासीन और उसके साथी नीले रंग की मारुति एस्टीम कार में पटपड़गंज स्थित मदर डेरी के पास आने वाले हैं.

इसके बाद राठी को उनके साथी पुलिसकर्मियों से सूचना मिली कि यासीन मिंटो रोड से गुजर रहा है. तभी राठी और उनके साथियों ने कार को कनॉट प्लेस क्षेत्र में रोका और उन पर गोलियां बरसा दी.

जगजीत सिंह और प्रदीप गोयल पुलिस की गोलियों से मारे गए जो व्यापारी थे और उनकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी, न ही उनका यासीन से कोई लेना-देना था.

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