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तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गिरफ़्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय राज्य गुजरात में एक फ़र्जी मुठभेड़ के मामले में दोषी पाए गए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के तीन अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया है. गिरफ़्तार पुलिस अधिकारियों में बॉर्डर क्षेत्र के उप महानिरीक्षक डीजी वंजारा, गुप्तचर ब्यूरो में तैनात पुलिस अधीक्षक राजकुमार पांड्यन हैं. तीसरे पुलिस अधिकारी राजस्थान से हैं, उनका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है. गुप्तचर ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी सुधीर सिन्हा ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि वंजारा और पांड्यन को राज्य के पुलिस मुख्यालय तलब किया गया था और उन्हें पुलिस महानिदेशक के सामने गिरफ़्तार किया गया. सिन्हा ने कहा कि उन्हें हत्या के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. ये गिरफ़्तारियां सोराबुद्दीन शेख की मौत के संबंध में हुई हैं. सोराबुद्दीन कथित तौर पर 26 नवंबर 2005 को गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) और राजस्थान पुलिस के संयुक्त अभियान में मारा गया था. उस वक़्त वंजारा एटीएस के प्रमुख थे और पांड्यन उनके नायब थे. जाँच एटीएस का दलील थी कि सोराबुद्दीन का संबंध चरमपंथी संगठन लश्करे तैयबा से है और उसे मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से गुजरात भेजा गया था. पुलिस की इस कार्रवाई को फ़र्जी मुठभेड़ बताते हुए सोराबुद्दीन के भाई ने सुप्रीम कोर्ट में न्याय की फरियाद की थी. इस मामले को संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जाँच के निर्देश दिए. आदेश जारी होने के बाद इस पूरे मामले की छानबीन की गई और सीआईडी जाँच में पुलिस के पक्ष में कई खामियाँ पाई गईं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'फ़र्जी मुठभेड़' मामले में आरोप पत्र12 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस 'फ़र्जी मुठभेड़' मामले में आरोप पत्र28 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मेहर की हत्या का 'अभियुक्त मारा'20 मई, 2006 | भारत और पड़ोस गुजरात में चार 'चरमपंथी' मारे गए17 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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