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'लोकतंत्र के लिए संघर्ष जारी रहेगा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने गुरुवार रात उनके काफ़िले पर हुए हमले के लिए सेना के पूर्व अधिकारियों को दोषी ठहराया है और कहा है कि लोकतंत्र के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने इस हमले को कायरतापूर्ण कार्रवाई बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था की जाँच की माँग की है. धमाके के बाद शुक्रवार को अपनी पहली प्रेस कांफ़्रेंस में भुट्टो ने इसे लोकतंत्र और पाकिस्तान की एकता और अखंडता पर हमला बताया. गुरुवार देर रात हुए इस आत्मघाती हमले में 130 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. बेनज़ीर भुट्टो ने कहा है कि वो आत्मघाती हमले के लिए सरकार को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा रहीं लेकिन उन्होंने इसकी जाँच की मांग की कि जिस समय धमाका हुआ उस समय सड़कों की बत्तियाँ क्यों बुझा दी गई थी. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता कि उनके सुरक्षा गार्ड आत्मघाती हमलावर को पकड़ सकते थे. बेनज़ीर भुट्टो ने कहा कि बम धमाकों से पहले उनके वाहन पर गोलियाँ चलाई गईं थीं ताकि इसे रोका जा सके. कराची स्थित अपने निवास बिलावल हाउस में एक प्रेस कांफ़्रेंस के दौरान बेनज़ीर भुट्टो ने धमाको की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि ये हमला किसी सच्चे मुसलमान ने नहीं किया है क्योंकि महिलाओं और निर्दोष लोगों को मारना इस्लाम के ख़िलाफ़ है. बेनज़ीर ने कहा कि चरमपंथी पाकिस्तानी जनता की उम्मीदों को ख़त्म करें, वह ऐसा नहीं होने देंगी. उन्होंने बताया कि धमाके में उनकी पार्टी के 50 सुरक्षा गार्ड मारे गए हैं. बेनज़ीर भुट्टो ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा है कि वे जनवरी में होने वाले चुनावों में हिस्सा लेंगी और इसके लिए उनके कार्यकर्ता तैयार हैं. रुढ़िवादियों की निंदा इससे पहले एक फ़्रांसीसी पत्रिका से बातचीत में बेनज़ीर भुट्टो ने आरोप लगाया कि पूर्व राष्ट्रपति ज़िया-उल-हक़ के रुढ़िवादी समर्थकों ने उन चरमपंथियों की सहायता की, जिन्होंने उन्हें मारने की कोशिश की. गुरुवार देर रात कराची में बेनज़ीर के काफ़िले पर हुए आत्मघाती हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 130 हो गई है. लेकिन इस हमले में बेनज़ीर बच गईं. धमाके के बाद एक फ़्रांसीसी पत्रिका पेरिस मैच को दिए इंटरव्यू में बेनज़ीर भुट्टो ने कहा कि बिना सहायता के इस्लामी चरमपंथी पहाड़ की गुफ़ा से काम नहीं कर सकते. बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी ने भी आरोप लगाया है कि इस हमले में सरकारी ख़ुफ़िया एजेंटों का हाथ है. ज़रदारी ने कहा, "किसे इन हमलों से फ़ायदा होगा. वे कथित आतंकवादियों की बात करते हैं. लेकिन मेरा मानना है कि हमलों के पीछे वो लोग हैं जो सत्ता में हैं. अगर मैडम भुट्टो को कुछ हो जाता तो पीपुल्स पार्टी कमज़ोर होती." उन्होंने कहा कि अब पाकिस्तान की सरकार को बेनज़ीर भुट्टो की सुरक्षा करनी चाहिए ताकि भविष्य में उन पर हमले ना हों. जाँच आठ साल बाद बेनज़ीर भुट्टो गुरुवार को पाकिस्तान लौटीं. वर्ष 1977 में ज़िया-उल-हक़ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो का तख़्ता पलट दिया था. दो साल बाद ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को फाँसी दे दी गई थी.
वर्ष 1988 में ज़िया-उल-हक़ की एक विमान हादसे में मौत हो गई थी. इसके बाद पाकिस्तान में हुए चुनाव में बेनज़ीर भुट्टो जीतीं और प्रधानमंत्री बनीं. गुरुवार रात को कराची में हुए धमाके के बाद पेरिस मैच को दिए इंटरव्यू में बेनज़ीर ने कहा, "मैं उन लोगों को जानती हूँ जो मुझे जान से मारना चाहते हैं. वे ज़िया-उल-हक़ के दौर के लोग हैं जो चरमपंथ और कट्टरपंथ के पीछे हैं." गुरुवार देर रात बेनज़ीर भुट्टो अपने समर्थकों के साथ जा रही थी तभी धमाके हुए. उस समय पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के लाखों समर्थक वहाँ मौजूद थे. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मंज़ूर मुग़ल ने बताया, "पहला धमाका ग्रेनेड के कारण हुआ जबकि दूसरा आत्मघाती हमला था. हमलावर भीड़ में आया और अपने को उड़ा लिया." उन्होंने बताया कि संदिग्ध आत्मघाती हमलावर का सिर मिल गया है और माना जा रहा है कि उसने अपने शरीर में 15-20 किलो विस्फोटक बाँध रखे थे. अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे धमाके की जाँच कर रहे हैं और ये भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कहीं इस हमले के तार अफ़ग़ानिस्तान से सटे क़बायली इलाक़े से तो जुड़े नहीं हैं. |
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