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गुरुवार, 18 अक्तूबर, 2007 को 13:20 GMT तक के समाचार
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भारत-रूस के बीच अहम रक्षा समझौता
सुखोई लड़ाकू विमान
भारत और रूस लंबे समय से सैन्य साझीदार हैं
भारत और रूस के बीच गुरूवार को हुए एक अहम रक्षा समझौते के तहत दोनों देश साझा रूप से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने पर सहमत हो गए हैं.

रूस की यात्रा पर गए भारत के रक्षामंत्री एके एंटनी ने इस संबंध में समझौते पर हस्ताक्षर किए.

उन्होंने इस अहम सैन्य क़रार को रूस के साथ पिछले छह दशकों के इतिहास में 'ऐतिहासिक' रक्षा समझौता क़रार दिया है.

उन्होंनें कहा कि पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के साझा विकास का समझौता दोनों देशों के बीच आधुनिक शस्त्र तकनीक के विकास का प्रतीक है.

एंटनी और रुसी रक्षामंत्री अनातोली सर्दुकोव की मौजूदगी में भारतीय रक्षा उत्पादन सचिव केपी सिंह और रूस की फ़ेडरल सर्विसेज़ फ़ार फ़ॉरेन मिलिटरी कोआपरेशन के महानिदेशक स्लाव जरकालन ने समझौते पर दस्तख़त किए.

अहम समझौता

एंटनी ने बताया कि विमानों के विकास कार्यक्रम में दोनों देशों की बराबर वित्तीय और तकनीकी भागीदारी होगी और इस संबंध में वायुसेना के साथ बौद्धिक संपदा अधिकार सहित सभी मुद्दों को सुलझा लिया गया है.

उन्होंने बताया कि पांचवी पीढ़ी का यह विमान अमरीका और ब्रिटेन के संयुक्त रूप से विकसित एफ़-35 का मुक़ाबला करने में सक्षम होगा. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह उड़ान भरने को कब तक तैयार होगा.

दोनों देशों के बीच संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल की तर्ज़ पर ही यह समझौता हुआ है.

रूस के प्रमुख अख़बार कॉमरसांट के अनुसार रूसी सुखोई विमान पर आधारित पांचवी पीढ़ी के विमानों की यह परियोजना की लागत लगभग एक अरब डालर है.

रूस के वायुसेना प्रमुख जनरल अलेक्जेंडर जेलिन ने बताया कि पाँचवीं पीढ़ी का यह विमान 2009 तक उड़ान भर सकेगा और इसके एक साल बाद ही इसका वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो जाएगा.

उन्होंनें बताया कि इस विमान को 2015 तक पूरी तरह विकसित कर लिया जाएगा.

सुखोई कोआपरेशन के अध्यक्ष मिखाईल पोगोसयान का कहना है कि इन विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुके बहुद्देशीय सुखोई-30एमकेआई के आधार पर विकसित किया जाना है.

हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड ने सुखोई के पुर्ज़ों के लिए रूस के साथ समझौता किया है जो देश में ही विमान को तैयार करने का प्रमुख काम करता है.

गौरतलब है कि भारत और रूस वर्षों से प्रमुख सैन्य साझीदार हैं.

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