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भारत को भी अमरीकी सहयोग बढ़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमरीका सरकार ने अपनी कंपनियों को बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की बिक्री में शामिल होने की इजाज़त दे दी है. भारतीय विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने शनिवार को कहा कि अमरीका का एक दल जल्दी ही भारत का दौरा करने वाला है जो भारत को लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के बारे में बातचीत करेगा. इससे पहले अमरीका ने पाकिस्तान को एफ़-16 लड़ाकू विमान देने का फ़ैसला किया था जिस पर भारत ने नाराज़गी जताई थी. भारतीय विदेश मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अमरीका भारत को असैनिक परमाणु ऊर्जा और परमाणु सुरक्षा सहयोग देने पर भी विचार कर रहा है. विज्ञप्ति में कहा गया है, "परमाणु ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अमरीकी फ़ैसला स्वागतयोग्य है और इससे भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा ज़रूरतें नज़र आती हैं." भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमरीका ने भारत के साथ अपने सामरिक सहयोग को और आगे बढ़ाने की भी मंशा ज़ाहिर की है. अमरीका ने भारत के साथ अंतरिक्ष सहयोग के लिए एक कार्यकारी दल भी गठित करने की बात कही है. ग़ौरतलब है कि अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा शुक्रवार को कहा था कि पाकिस्तान को अगले पाँच वर्षों में उसे दी जानेवाली तीन अरब डॉलर की सहायता के तहत एफ़-16 लड़ाकू दिए जाएँगे. इस क़दम को पाकिस्तान की आतंकवाद के विरूद्ध लड़ाई में अमरीका का साथ देने के इनाम के तौर पर देखा जा रहा है. भारत ने अमरीका के इस फ़ैसले पर निराशा जताई थी. |
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