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पाकिस्तान परमाणु पुर्ज़े सौंपने पर सोचेगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी को पाकिस्तानी परमाणु संयंत्र के पुर्ज़े भेजने पर विचार कर रहे हैं ताकि उसे इस बात की जाँच करने में मदद मिल सके कि क्या ईरान परमाणु हथियार विकसित कर रहा है. पाकिस्तान ने स्वीकार किया है कि उसके परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल क़दीर ख़ान ने ईरान को परमाणु सूचनाएँ मुहैया कराई थीं. इन सूचनाओं से संवर्द्धित यूरेनियम बनाए जाने में मदद मिलती जिसका परमाणु हथियार बनाए जाने में इस्तेमाल किया जा सकता था. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को ईरान के उपकरणों में संवर्द्धित यूरेनियम के अंश मिले थे और ईरान ने उसका दोषी पाकिस्तान से मिले पुराने सेट्रीफ़्यूज उपकरणों को ठहराया था. हालाँकि इस महीने के शुरू में पाकिस्तान ने इस तरह की रिपोर्टों का खंडन किया था कि वह अपने सेंट्रीफ़्यूज़ उपकरणों के पुर्ज़े संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों के हवाले करेगा. लेकिन अब राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने एक टेलीविज़न चैनल से कहा कि पाकिस्तान इस मामले में सहयोग करने के लिए बस 'एक बार' यह क़दम उठा रहा है और इसके लिए या तो ये पुर्ज़े वियना स्थित अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के दफ़्तर भेजे जाएँगे या उसके निरीक्षकों को पाकिस्तान आने को कहा जाएगा. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा, "हमने उनसे कहा है कि ठीक है, हम आपको यह दे देंगे और आप चाहें तो उनका कहीं बाहर निरीक्षण करा लें या आप यहाँ भी आ सकते हैं. लेकिन बस एक बार ही. हमने उनसे कह दिया है कि अगली बार आप हमसे इसके लिए न कहें". इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता ज़फ़र अब्बास के अनुसार इस क़दम का उद्देश्य यह हो सकता है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवाद से पाकिस्तान का नाम हट जाए. |
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