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परमाणु उपकरणों पर पाकिस्तान का खंडन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि वह संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को परमाणु संयंत्र के कुछ उपकरण सौंपने जा रहा है जिससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जाँच में सहायता मिल सके. पाकिस्तान के अधिकारियों ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र से जुड़े पश्चिमी देशों के कूटनयिकों के हवाले से जो ख़बरें आईं थीं वे आधारहीन हैं. इससे पहले पाकिस्तान ने स्वीकार कर चुका है कि उसके परमाणु कार्यक्रम के पूर्व प्रमुख अब्दुल क़दीर ख़ान ने ईरान को इसी तरह के हिस्से बेचे थे. इससे पहले ख़बरें आईं थीं उसमें परमाणु मामलों की जाँच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि पाकिस्तान परमाणु संयंत्र का कुछ हिस्सा (सेंट्रीफ़्यूज) संयुक्त राष्ट्र को उसके ऑस्ट्रिया स्थित प्रयोगशाला में सौंपेंगा. सेंट्रीफ़्यूज का प्रयोग कर संवर्धित यूरेनियम तैयार किया जाता है. कहा गया था कि प्रयोगशाला में ईरान में मिले यूरेनियम के अवशेषों का परीक्षण करके आकलन किया जाएगा कि क्या इसे पाकिस्तान में तैयार किया गया था. जाँच वियना स्थित इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) पिछले दो सालों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जाँच कर रही है.
हालांकि अभी तक आईएईए को ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जिसके आधार पर यह साबित हो सके कि ईरान परमाणु कार्यक्रम चला रहा है लेकिन ऐसा भी साबित नहीं किया जा सका है कि शांति पूर्ण कार्यक्रम के लिए परणाणु कार्यक्रम चलाने का ईरान का दावा सही है. तेल और गैस के भंडार से पूर्ण ईरान पर अमरीका परमाणु हथियार बनाने का आरोप लगाया है. 2003 में आईएईए को यूरेनियम के कुछ टुकड़े मिले थे. ये यूरेनियम उसी गुणवत्ता के थे जिसका प्रयोग हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है. इसी के बाद से यह आशंका जताई जा रही थी कि ईरान को संवर्धित यूरेनियम लगातार मिलता रहा है. |
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