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बुधवार, 02 मार्च, 2005 को 16:12 GMT तक के समाचार
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ईरान पर बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव
परमाणु कारखाने
ईरान के साथ ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस बातचीत कर चुके हैं.
ईरान पर अपने परमाणु कार्यक्रमों को लेकर और अधिक पारदर्शी रवैया अपनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा है.

अमरीका ने एक बार फिर ईरान पर आरोप लगाए हैं कि वह परमाणु हथियार हासिल करने की होड़ में पूरी दुनिया को धोखा देने में लगा हुआ है.

अमरीका के साथ साथ संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देशों का भी कहना है कि ईरान परमाणु संवर्धन का अपना कार्यक्रम स्थगित करने के बारे में किए गए अपने वादे को पूरा नहीं कर रहा है.

संयुक्त राष्ट्र परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख मोहम्मद अल बारादेई ने कहा कि अब गेंद ईरान के पाले में है और अब उसे ही अपनी स्थिति स्पष्ट करनी है.

आईएईए ने मंगलवार को ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में अपनी एक रिपोर्ट पेश की थी.

संभावना है कि इस रिपोर्ट पर ईरान बुधवार को अपनी प्रतिक्रिया देगा.

आईएईए का बयान

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के बाद अमरीका ने एक बार फिर ईरान के ख़िलाफ़ कड़ा रुख अपनाया है.

 अगर मैं ये कहता हूं कि ईरान को तीन महत्वपूर्ण काम करने हैं तो मैं कहूंगा कि वो है पारदर्शिता, पारदर्शिता और अधिक पारदर्शिता
मोहम्मद अल बारादेई

संगठन के प्रमुख मोहम्मद अल बारादेई ने कहा कि अब ईरान को अपने कार्यक्रम के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी है और पूर्ण रुप से पारदर्शी रवैया अपनाना है.

उन्होंने कहा " अगर मैं ये कहता हूं कि ईरान को तीन महत्वपूर्ण काम करने हैं तो मैं कहूंगा कि वो है पारदर्शिता, पारदर्शिता और अधिक पारदर्शिता."

इससे पहले ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस इस मुद्दे पर ईरान के साथ बातचीत कर चुके हैं.

हालांकि इन देशों ने भी अपनी चिंताएं ज़ाहिर करनी शुरु कर दी है.

अमरीका का कड़ा रुख

आईएईए में अमरीका की प्रतिनिधि जैकी सांडर्स ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अभी भी कई सवाल अनसुलझे हैं.

सांडर्स ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में ऐसे कई मुद्दे उठाए गए हैं.

सांडर्स ने कहा " आईएईए अभी तक यह आश्वासन नहीं दे सका है कि ईरान अपने कुछ गुप्त ठिकानों से परमाणु गतिविधियां नहीं चला रहा है. "

सांडर्स ने मांग की कि ईरान के मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के समक्ष ले जाया जाए ताकि उस पर प्रतिबंध लगाए जा सकें.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने एजेंसी के साथ पर्याप्त सहयोग नहीं किया है और पारचीन में अपने परमाणु कारखाने में जाने की अनुमति नहीं दी.

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