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लड़ाकू विमानों के लिए अंतरराष्ट्रीय टेंडर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने 126 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए विश्व स्तर पर तकरीबन दस अरब डॉलर का ठेका आमंत्रित किया है. राजधानी दिल्ली में ठेके के बारे में घोषणा की गई जिसके तहत पांच प्रमुख दावेदारों से ठेके के लिए निविदाएं मंगाई गई हैं. उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से लगातार लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं और अब इनकी संख्या घटकर मात्र 576 रह गई है. पिछले आठ साल से लड़ाकू विमानों की खरीद नहीं हुई है. प्रस्ताव के तहत 18 नए विमान खरीदे जाएंगे जबकि बाकी 108 विमानों का निर्माण तकनीकी हस्तांतरण के तहत किया जाएगा. पहले 18 विमान 2012 तक वायु सेना में शामिल हो सकेंगे. प्रस्ताव में यह प्रावधान भी है कि भारत आने वाले दिनों में इन्हीं शर्तों पर और 64 विमान खरीद सकता है. जिन छह कंपनियों से निविदाएं मंगाई गई हैं वो हैं अमरीका की लॉकहीड मार्टिन और बोईंग, फ्रांस की डसाल्ट, स्वीडन की साब्स ग्रीपन, यूरोप की टायफून और रुस एयरक्राफ्ट कारपोरेशन. रक्षा सूत्रों के अनुसार चयन प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाएगी और नए लड़ाकू विमान 40 साल तक काम कर सकेंगे या फिर छह हज़ार घंटे उड़ान भरेंगे. नए प्रस्ताव के तहत जब तक ये विमान काम करेंगे तब कंपनियों को इन विमानों के कलपुर्ज़े देने होंगे और देखरेख मुहैया करनी होगी. ये सभी विमान हवा में ईंधन भर सकने में सक्षम होंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें पाकिस्तान के पुराने विमानों पर रोक03 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस ख़ुद देख नहीं सकते पर सहारा बनने की कोशिश28 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस अगर विमान सड़क पर फंस जाए तो...04 मई, 2007 | भारत और पड़ोस अब 'लापता' हो गया 'लावारिस' विमान05 मई, 2007 | भारत और पड़ोस भारत में उतरा ए-380 विमान06 मई, 2007 | भारत और पड़ोस भारत-रूस वायुसीमा विवाद समाप्त15 मई, 2007 | भारत और पड़ोस लड़ाकू विमानों की ख़रीद को मंज़ूरी30 जून, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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