|
'सेना को मिलेगी मिसाइलरोधी प्रणाली' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के मिसाइल कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार सारस्वत ने कहा है कि मिसाइल से मिसाइल को मार गिराने वाली प्रणाली चार साल के अंदर सेना को सौंप दी जाएगी. पिछले सप्ताह पृथ्वी मिसाइल से मिसाइल को टकराने का सफल परीक्षण किया गया था. सारस्वत ने कहा कि अगले चार वर्ष में इस प्रणाली को बतौर हथियार सेना के हवाले कर दिया जाएगा. इस परीक्षण के बारे में जानकारी देते हुए मिसाइल और स्ट्रेटजिक सिस्टम्स के मुख्य नियंत्रक और वायु रक्षा कार्यक्रम के निदेशक डॉक्टर सारस्वत ने बताया कि हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) एक ऐसी 'एंटी मिसाइल' तैयार करेगा जो परीक्षण किए गए मिसाइल से कहीं अधिक शक्तिशाली और तेज़ रफ़्तार होगी. यह नई मिसाइल चार महीनों के भीतर आज़माया जाएगा ताकि भारत की रक्षा प्रणाली को और बेहतर बनाया जा सके. 27 नवंबर को उड़ीसा के वेलूर द्वीप में एक मिसाइल ने करीब 72 किलोमीटर दूर से दागी गई पृथ्वी-2 मिसाइल को हवा में 50 किलोमीटर की ऊँचाई पर नष्ट कर दिया था. सारस्वत ने बताया कि नई मिसाइल 10 से 30 किलोमीटर की ऊँचाई पर दुश्मन की मिसाइल को निशाना बना सकती है. अहमियत उन्होंने कहा कि जिस मिसाइल को विकसित किया जा रहा है, वो देश की रक्षा प्रणाली के लिए बेहद अहम है. क्योंकि यह देश पर होने वाले किसी भी मिसाइल हमले को नाकाम कर सकती है. सारस्वत ने कहा, "देश में ऐसा एक कार्यक्रम होना ज़रूरी है, क्योंकि किसी परमाणु या रासायनिक हथियार से लैस मिसाइल का हमला देश के लिए बड़ा नुकसान होगा." जिस प्रणाली का परीक्षण पिछले हफ़्ते किया गया था, उसमें मिशन कंट्रोल सेंटर के अलावा नई तकनीक और दूर से दुश्मन का पता लगाने वाले रडार लगे हुए थे. जवाबी कार्रवाई के लिए मिसाइल दागने के केंद्र देश के विभिन्न हिस्सों में बनाए गए हैं ताकि किसी एक केंद्र पर दुश्मन के हमले की स्थिति में मिसाइल रोधी प्रणाली की ताक़त प्रभावित न हो सके. ये सारी प्रणाली स्वचालित है. जैसे ही रडार दुश्मन मिसाइल का पता लगाते हैं, मिशन कंट्रोल केंद्र संबंधित केंद्रों को चौकन्ना कर देता है और उस केंद्र के कंप्यूटर जवाबी कार्रवाई के लिए प्रक्षेपण केंद्र को हमलावर मिसाइल की स्थिति की जानकारी देना शुरू कर देते हैं. इस परीक्षण की कामयाबी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये मिसाइलरोधी प्रणाली अभी दुनिया में सिर्फ़ तीन देशों अमरीका, रूस और इसराइल के पास है. फ़्रांस और दूसरे कई अन्य विकसित देश अभी इस प्रणाली को तैयार करने की कोशिशों में हैं. पाकिस्तान ख़तरा नहीं एक सवाल के जवाब में सारस्वत ने कहा कि पाकिस्तान का मिसाइल कार्यक्रम भारत के लिए कोई ख़तरा नहीं है. पाकिस्तान के पास जिस मारक दूरी की मिसाइलें हत्फ़ और शाहीन हैं, उतनी ही मारक क्षमता की मिसाइलें भारत के पास भी हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अब तक जितने भी मिसाइल परीक्षण किए हैं, उन्हें दो हिस्सों में बाँटा जा सकता है. हत्फ़ श्रेणी में हत्फ़-2 की मारक दूरी 80 किमी, हत्फ़-3 की 300 किमी और हत्फ़-4 की मारक क्षमता 400 किमी तक है. जबकि शाहीन श्रेणी में शाहीन-1 की मारक क्षमता 1000-1500 किमी है और शाहीन-2 दो हज़ार किमी तक मार कर सकती है. इसी रेंज की मिसाइलें भारत के पास भी हैं. उन्होंने कहा कि भारत अग्नि-3 मिसाइल विकसित करने में जुटा है और इसकी मारक क्षमता पाँच हजार किमी है. उम्मीद है कि अगले तीन साल में यह मिसाइल तैयार कर ली जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'पृथ्वी मिसाइलें सफलतापूर्वक टकराईं'27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भारत ने किया पृथ्वी मिसाइल का परीक्षण 19 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस त्रिशूल मिसाइल का सफल परीक्षण23 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस अग्नि III के परीक्षण में तकनीकी गड़बड़ी09 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस भारत ने अग्नि-3 का परीक्षण किया09 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस भारत, पाक के मिसाइल परीक्षण26 मार्च, 2003 | पहला पन्ना इग्ला मिसाइलें कितनी ख़तरनाक?13 अगस्त, 2003 | पहला पन्ना अब भारत में बनेगी फ्रांसीसी पनडुब्बी06 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||