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श्रीलंका में मानवाधिकार स्थिति की निंदा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था ने श्रीलंका में मानवाधिकार की ख़राब स्थिति की निंदा करते हुए पूछा है कि सरकार इसे सुधारना भी चाहती है या नहीं. मानवाधिकार उच्चायुक्त लुईस आर्बर ने एक बार फिर गृहयुद्ध की चपेट में आ गए श्रीलंका का दौरा करने के बाद यह बयान जारी किया है. इस बीच श्रीलंका सरकार ने मानवाधिकार पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. मानवाधिकार पर निगरानी रखने वाली न्यूयॉर्क की संस्था 'ह्यूमनराइट्स वॉच' के अनुसार श्रीलंका में हाल ही में एक हज़ार लोगों का अपहरण हुआ है. हालांकि सरकार का कहना है कि ये शिकायतें झूठी हैं. विश्वास की कमी अपने श्रीलंका दौरे के दौरान लुईस आर्बर ने मंत्रियों से और उन लोगों से मुलाक़ात की है जिनके परिजन इस बीच लापता हो गए हैं. उन्होंने कहा, "हथियार बंद विद्रोह और आतंकवाद के ख़िलाफ़ उठाए जा रहे क़दमों के बीच लचर क़ानून व्यवस्था और दोषियों को सज़ा मिलने में कमी के मामले बहुत अधिक हैं." उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में फ़्रासिसी सहायता एजेंसी के 17 कार्यकर्ताओं के मारे जाने के मामले की जाँच जो आयोग कर रहा है, उस पर लोगों का विश्वास कम है. उच्चायुक्त ने लड़ाई के लिए बच्चों को चुनने, लोगों को ज़बरदस्ती भर्ती करने और नागरिकों को मारने के लिए तमिल विद्रोहियों की भी निंदा की है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निगरानी मिशन से स्थिति में सुधार आ सकता है. लेकिन श्रीलंका सरकार ने उनके इस प्रस्ताव को ख़ारिज करते हुए कहा है कि उन्हें अपनी क्षमताएँ बढ़ाने के लिए और सहायता की ज़रुरत है. | इससे जुड़ी ख़बरें सेना और विद्रोहियों के बीच संघर्ष07 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस एलटीटीई के अड्डे पर क़ब्ज़े का दावा02 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस सरकारी ठिकानों पर हमले की धमकी12 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस एलटीटीई और सेना के बीच संघर्ष03 जून, 2007 | भारत और पड़ोस तमिल विद्रोहियों ने फिर किया हवाई हमला29 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस बच्चों के 'अपहरण' की आलोचना24 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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