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सू ची से बातचीत के लिए मंत्री नियुक्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा के सरकारी टेलीविज़न के हवाले से बताया गया है कि लोकतंत्र समर्थकों की नेता सू ची से बातचीत के लिए सैनिक शासन ने एक मंत्री नियुक्त किया है. बर्मा सरकार की ओर से ऐसा क़दम संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी के कहने पर और संयुक्त राष्ट्र की ओर से सैनिक शासन पर लगातार पड़ रहे दबाव के चलते उठाया गया है. बर्मा की ताज़ा स्थिति पर नज़र रखने के लिए नियुक्त इब्राहिम गम्बारी ने पिछले सप्ताह देश के सैनिक शासन के प्रमुख, जनरल थान श्वे से मुलाक़ात के दौरान ऐसा किए जाने की पेशकश की थी. ग़ौरतलब है कि सैनिक शासन वाले बर्मा में पिछले कुछ दिनों से सैन्य शासन के ख़िलाफ़ लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं. इन प्रदर्शनों और अभियानों को दबाने के लिए हुए बल प्रयोग और हिंसा में लगभग दर्जन भर लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोगों को जेलों में डाल दिया गया है. बर्मा की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कुछ देशों और संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता जताई है. इसी के मद्देनज़र गम्बारी ने बर्मा का दौरा करके वहाँ की स्थिति से संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद को अवगत भी कराया था. सोमवार को सुरक्षा परिषद की ओर से बर्मा में उपजी संकट की स्थिति पर एक बयान के मसौदे पर चर्चा भी होनी है. स्थिति चिंताजनक उधर बर्मा में तीन दिन तक छिपकर हालात का जायज़ा लेने वाले एक बीबीसी संवाददाता ने बताया है कि लोकतंत्र समर्थकों के ख़िलाफ़ सैनिक शासन का हिंसक दमन अभी थमा नहीं है.
उन्होंने बताया कि अपने काम के दौरान उन्हें लोकतंत्र समर्थकों के ख़िलाफ़ सरकारी दमन के बारे में जो कुछ जानने-सुनने को मिला है, वह काफ़ी तकलीफ़देह है. रंगून में ऐसी ख़बरे भी मिली है कि सैनिकों ने प्रदर्शन के दौरान मारे गए बौद्ध भिक्षुओं के शवों को नष्ट करने के लिए उन्हें स्थानीय शमशान में जला दिया है. ऐसा भी बताया जा रहा है कि कुछ इस्तेमाल से बाहर हो चुकी इमारतों में सरकार की ओर से बौद्ध भिक्षुओं को बंदी बनाकर रखा गया है. यहाँ तक कि इन बौद्ध भिक्षुओं का उनके प्रदर्शनों के दौरान समर्थन करने वालों को भी सेना ने बक्शा नहीं है. संवाददाता ने बताया कि खुफ़िया पुलिस के लोग हर तरफ सक्रिय हैं और पूरे रंगून में भय, तनाव व्याप्त है. | इससे जुड़ी ख़बरें बर्मा: लोकतंत्र के संघर्ष पर भारत का रुख़06 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस लोकतंत्र समर्थकों के हिंसक दमन की निंदा06 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में हालात सुधरने के आसार कमः गम्बारी05 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस सैनिक शासक सू ची से मिल सकते हैं04 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा पर भारत की दुविधा और चुप्पी26 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी22 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में बौद्ध भिक्षु सड़कों पर उतरे21 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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