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बुधवार, 03 अक्तूबर, 2007 को 09:33 GMT तक के समाचार
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पैनल का एक जज सुनवाई से हटा
परवेज़ मुशर्रफ़
मुशर्रफ़ की वर्दी के इर्दगिर्द विवाद घूम रहे हैं
पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के उस पैनल के एक जज ने अपना नाम वापस ले लिया है जो राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की उम्मीदवारी को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है.

ग़ौरतलब है कि छह अक्तूबर को राष्ट्रपति पद के चुनाव होने हैं और परवेज़ मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष के पद पर रहते हुए इस चुनाव के प्रत्याशी हैं.

बाक़ी दो प्रत्याशियों - वजीहुद्दीन अहमद और मख़दूम अमीन फ़हीम ने सेनाध्यक्ष रहते हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में मुशर्रफ़ की उम्मीदवारी को चुनौती दी है. उनका कहना है कि परवेज़ मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष रहते हुए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार नहीं हो सकते हैं.

वजीहुद्दीन अहमद सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज हैं और उन्हें वकीलों ने अपना उम्मीदवार बनाया है. मख़दूम अमीन फ़हीम पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के संसदीय नेता हैं और इस चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार भी.

सुप्रीम कोर्ट इसी तरह की याचिकाओं को पिछले सप्ताह ख़ारिज कर चुका है जो वकीलों ने दायर की थीं. सरदार रज़ा ख़ान भी उस पैनल के एक जज थे जिसने उन याचिकाओं की सुनवाई की थी और पैनल ने तीन के मुक़ाबले छह के बहुमत से उन याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की एक बड़ी जीत माना गया था और राष्ट्रपति पद के चुनाव में उनकी उम्मीदवारी का रास्ता साफ़ हुआ था.

अब सुप्रीम कोर्ट के नौ सदस्यों वाले पैनल के एक जज सरदार रज़ा ख़ान ने नई याचिकाओं पर सुनवाई से अपना हाथ खींच लिया है. संवाददाताओं का कहना है कि पैनल से उनके हट जाने के बाद सुनवाई में देरी होगी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट को अब नया पैनल बनाना पड़ेगा.

'वैसा ही मामला'

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार जज सरदार रज़ा ख़ान ने कहा है, "मैं नहीं समझता कि मुझे इस बैंच में सुनवाई के लिए बैठना चाहिए क्योंकि मैं इसी मामले में पहले दाख़िल की गई याचिकाओं पर अपनी राय दे चुका हूँ. यह नया केस भी बिल्कुल पहले जैसा ही है, इसमें कोई फ़र्क नहीं है."

पैनल के अध्यक्ष जज जावेद इक़बाल ने एएफ़पी को बताया कि नौ सदस्यों वाले इस पैनल को फिर से गठित करने की पूरी कोशिश की जाएगी.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के वकीलों के अनुसार अगर मुशर्रफ़ फिर से राष्ट्रपति चुन लिए जाते हैं तो सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे.

विपक्षी दलों का कहना है कि परवेज़ मुशर्रफ़ की उम्मादवारी ग़ैरक़ानूनी है क्योंकि वह पहले ही सेनाध्यक्ष के पद से इस्तीफ़ा देने का वादा कर चुके थे लेकिन अब उन्होंने ऐसा नहीं किया है.

अस्सी से ज़्यादा विपक्षी सांसदों और कुछ प्रांतीय एसेंबलियों के सदस्यों ने शनिवार के चुनाव के विरोध में इस्तीफ़े भी दे दिए हैं. इनमें ज़्यादातर इस्लामी पार्टियों के गठबंधन एमएमए और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ गुट के सदस्य हैं. मुस्लिम लीग (नवाज़) पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की अध्यक्षता वाली पार्टी है.

संवाददाताओं का कहना है कि इन इस्तीफ़ों के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ का फिर से चुनाव और आसान हो जाएगा क्योंकि उन्हें किसी ख़ास विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा.

पाकिस्तान की सबसे बड़ी पीपुल्स पार्टी ने चुनाव के बहिष्कार में हिस्सा नहीं लिया है.

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