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'सालाना जलसा न रह जाए अहिंसा दिवस' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पहले अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी का जन्मदिन महज एक सालाना जलसा बन कर नहीं रह जाना चाहिए. सोनिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद और परमाणु निरस्त्रीकरण के मामले में विफल रहा है. उनका कहना था कि दुनियाभर में लोगों को विभिन्न तरह की हिंसा का सामना करना पड़ रहा है. सोनिया गांधी ने महासभा को अपने संबोधन में कहा,'' आज सवाल महात्मा गांधी की प्रासंगिकता का नहीं है... सवाल है कि हममें इतना साहस है कि हम उनकी बातों को अमल में ला सकें जिनके लिए उन्होंने जीवन पर्यन्त संघर्ष किया.'' संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधन में उनके साथ उनके पुत्र और सांसद राहुल गांधी, भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी और विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा वहाँ मौजूद थे. ग़ौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने इसी साल दो अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव स्वीकार किया था. 'अहिंसा को लेकर भ्रम' सोनिया गांधी ने अहिंसा को कमजोरी मानने की बात को ठुकराते हुए कहा कि अहिंसा की अवधारणा को लेकर काफ़ी भ्रम हैं.
उनका कहना था कि सत्य से बढ़कर कुछ नहीं है. इसको अमल में लाने के लिए कड़े अनुशासन, साहस और नैतिकता की ज़रूरत होती है. इसके पहले भारतीय मूल के लोगों की संस्था इंडियन नेशनल ओवरसीज़ कांग्रेस में सोनिया गांधी ने दुनिया भर में बसे भारतीयों की उपलब्धियों को अनुकरणीय बताया और कहा कि भारत के लोग जिस देश में भी गए वहाँ कामयाबी हासिल कर देश का नाम ऊंचा किया. सोनिया गांधी ने कहा कि विश्व के किसी अन्य समुदाय के लोग इतने बड़े पैमाने पर इस उपलब्धि को हासिल नहीं कर पाए हैं. अपने पति राजीव गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनका मानना था कि भारत से लोगों का दूसरे देशों में जाना ‘प्रतिभा पलायन’ नहीं बल्कि हमारे देश के लिए यह ‘प्रतिभा बैंक’ का निर्माण करना है. |
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