BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 02 अक्तूबर, 2007 को 06:42 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
गूजर गिरफ़्तारियाँ देने के लिए सड़कों पर उतरे

गूजर (फ़ाइल फ़ोटो)
गूजर अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग कर रहे हैं
राजस्थान में गूजर समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग को लेकर इस समुदाय के हज़ारों सदस्य पूरे राज्य में गिरफ़्तारियाँ देने जा रहे हैं.

गूजरों ने राज्य भर में सात स्थानों पर गिरफ़्तारियाँ देने की घोषणा की है और कहा है कि यह शांतिपूर्ण आंदोलन है.

राज्य सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं और जगह-जगह खुली जेल बनाकर गिरफ़्तार किए गए लोगों को रखने का इंतज़ाम किया है.

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में 29 मई से 4 जून के बीच हुईं हिंसा में 25 लोग मारे गए थे.

गिरफ़्तारी

गूजर नेताओं ने दावा किया है कि राज्य भर मे चार से पाँच लाख लोग गिरफ़्तारियाँ देंगे.

उनका कहना है कि ये सभी लोग जयपुर, भरतपुर, कोटा, राजसमंद, बीकानेर, खेतड़ी और अजमेर सहित सात जगह लंबे समय के लिए गिरफ़्तारी देने जा रहे हैं.

उधर प्रशासन का कहना है कि उन्होंने डेढ़ लाख लोगों को गिरफ़्तार करके रखने का इंतज़ाम किया है.

सुबह से हज़ारों की संख्या में गूजर समुदाय के लोग इन स्थानों पर इकट्ठे हो रहे हैं.

प्रशासन ने सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों की तीस कंपनियाँ तैनात की हैं जो राज्य पुलिस की तैनाती के अतिरिक्त है.

गिरफ़्तार किए गए लोगों को ढोने के लिए राज्य परिवहन की 1100 बसों और बड़ी संख्या में निजी कंपनियों की बसों का इंतज़ाम किया गया है.

गिरफ़्तार किए गए लोगों के लिए खाने आदि का भी इंतज़ाम किया गया है.

माना जा रहा है कि गिरफ़्तारी देने वालों में सांसद सचिन पायलट और रमा पायलट सहित कई बड़े गूजर नेता होंगे.

गूजर समुदाय के इस आंदोलन के चलते कई शहरों में दूध की कमी हो गई है. जयपुर शहर में ही 25 हज़ार लीटर दूध की कमी की रिपोर्ट है लेकिन कहा गया है कि सरकारी डेयरी से इसकी भरपाई की कोशिशें की जा रही हैं.

माँग

ग़ौरतलब है कि राजस्थान में गूजरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है लेकिन वे अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाली आरक्षण सुविधा की मांग कर रहे हैं.

गूजर आंदोलन
अपनी माँगों को लेकर गूजर सड़कों पर उतर आए थे

13 सितंबर को हुई गूजर महापंचायत में सरकार को दो अक्तूबर तक का समय दिया गया था और साथ में अल्टीमेटम दे दिया गया था कि अगर तब तक सरकार कोई फ़ैसला नहीं करती है तो वे गिरफ़्तारियाँ देंगे.

इससे पहले जून में इस मांग को लेकर गूजर समुदाय सड़कों पर उतर आया था और उनके आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया था.

इस आंदोलन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों समेत 25 लोगों की जानें गई थीं.

राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में भी गूजर समाज के लोग इस आंदोलन से जुड़ गए थे.

इस दौरान हुए धरने-प्रदर्शनों के कारण सामान्य जनजीवन ख़ासा प्रभावित हुआ था.

बंदसुप्रीम कोर्ट नाराज़
सुप्रीम कोर्ट ने गूजरों के दिल्ली बंद के दौरान हिंसा को ''राष्ट्रीय शर्म'' बताया.
गूजर व्यक्तिगूजरों का अतीत
गूजर एक समय कुशल योद्धा माने जाते थे.जानिए, उनका अतीत
इससे जुड़ी ख़बरें
आरक्षण पर गूजरों का 'अल्टीमेटम'
13 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस
पहले मुक़दमा और अब विचार-विमर्श
07 जून, 2007 | भारत और पड़ोस
गूजरों ने फिर आंदोलन की चेतावनी दी
23 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस
गूजरों ने तीन महीने का समय दिया
24 जून, 2007 | भारत और पड़ोस
मीडिया की भूमिका पर उठे सवाल
16 जून, 2007 | भारत और पड़ोस
गूजर समुदाय ने आंदोलन वापस लिया
04 जून, 2007 | भारत और पड़ोस
सरकार और गूजरों के बीच समझौता
04 जून, 2007 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>