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...गाँव भर के पुरुषों की नग्न परेड

पुरुषों की परेड
एक-एक कर सभी के शरीर का पंचायत के प्रतिनिधियों ने निरीक्षण किया
राजस्थान के अजमेर ज़िले के एक गाँव में बलात्कार के अभियुक्त को खोजने के लिए पंचायत ने एक अनोखा और अजीब फ़ैसला सुनाया.

दोषी को खोजने के लिए पंचायत ने गाँव भर के पुरुषों के कपड़े उतरवा दिए और उनकी जाँच की ताकि बलात्कारी का पता लगाया जा सके.

हालांकि पंचायत के इस फ़ैसले को अमल में लाने के बाद भी बलात्कार करने वाले का पता नहीं लगाया जा सका.

पंचायत ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा था कि गाँव के हर व्यक्ति को कपड़े उतारकर अपने शरीर की जाँच करवानी होगी ताकि इस बात की जाँच हो सके कि उनके शरीर पर कोई चोट या खरोच का ताज़ा निशान तो नहीं है.

पंचायत का मानना था कि इस तरह बलात्कार करने वाले का पता लगाया जा सकेगा.

 इतना ज़रूर था कि इस घटना को लेकर गाँव में आक्रोश था लेकिन ऐसी किसी पंचायत के बारे में पता नहीं है. अगर कोई क़ानून का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई की जाएगी
पुलिस उप-अधीक्षक, अजमेर

फिर क्या था, पंचायत के फ़ैसले पर 100 से भी ज़्यादा पुरुषों के कपड़े उतरवा दिए गए और उनकी जाँच की गई.

उधर पुलिस का कहना है कि वे इस पूरी घटना की जानकारी जुटा रही है.

घटना

अजमेर के बोराज गाँव में शनिवार की रात एक विवाहिता की निर्जन स्थान पर निर्ममता से हत्या कर दी गई थी.

बाद में पाया गया कि हत्या से पहले विवाहिता के साथ बलात्कार भी हुआ था जिसके बाद लोगों में रोष फूट पड़ा.

इसके बाद सोमवार को गाँव में एक पंचायत लगी जिसमें यह फ़ैसला लिया गया और फिर एक-एक व्यक्ति के कपड़े उतारकर उसकी जाँच की गई.

गाँव के एक निवासी तारा रावत ने बीबीसी को बताया कि गाँव के लोगों ने स्वेच्छा से कपड़े उतारकर अपना बदन दिखाया ताकि किसी पर संदेह न हो.

पुरुषों की परेड
गाँव के 100 से ज़्यादा लोगों की परेड करवाई गई

रावत ने बताया कि इस घटना से पूरा गाँव नाराज़ था और लोग जानना चाहते थे कि कहीं गाँव का ही कोई व्यक्ति तो इस घटना में शामिल नहीं. इसी संदेह को दूर करने के लिए यह कवायद की गई.

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि वो पंचायत के इस निर्णय का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं.

अजमेर के पुलिस उप-अधीक्षक ने इस बाबत बताया, "इतना ज़रूर था कि इस घटना को लेकर गाँव में आक्रोश था लेकिन ऐसी किसी पंचायत के बारे में पता नहीं है. अगर कोई क़ानून का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई की जाएगी."

वैसे राजस्थान में ऐसी पंचायतों का आयोजन कोई नई बात नहीं है. इससे पहले राज्य के चित्तौड़गढ़ ज़िले में चोरी के एक मामले का पता लगाने के लिए लोगों को गर्म तेल में हाथ डालने के लिए बाध्य किया गया था.

मानवाधिकार कार्यकर्ता ऐसी पंचायतों पर रोक लगाने की लगातार माँग करते रहे हैं.

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