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वाघा का नाम बदलकर अटारी बॉर्डर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित ऐतिहासिक वाघा बॉर्डर का जो हिस्सा भारत में आता है, उसका नाम बदलकर अब अटारी बॉर्डर कर दिया गया है. इस बारे में शनिवार को पंजाब सरकार की ओर से एक बयान जारी किया गया है जिसके मुताबिक भारत की ओर स्थित सीमा क्षेत्र को अब अटारी बॉर्डर के नाम से जाना जाएगा. भारत और पाकिस्तान की सीमा पर स्थित वाघा बॉर्डर के रास्ते दोनों ओर से लोगों का आना-जाना होता है. पंजाब सरकार ने बताया है कि ऐसा किए जाने की सिफारिश केंद्र सरकार से की गई थी जिसे केंद्र से मंज़ूरी मिलने के बाद वाघा बॉर्डर का नाम अब अटारी बॉर्डर होगा. इस ऐतिहासिक सीमा क्षेत्र ने भारत-पाकिस्तान के विभाजन से लेकर अभी तक कई ऐतिहासिक पलों को देखा है. ऐतिहासिकता का सवाल विभाजन के 60 वर्ष बीत जाने के बाद अब पंजाब और भारत सरकार को ध्यान आया है कि दरअसल वाघा नाम का गांव तो पाकिस्तान के हिस्से में आता है जबकि इस सीमा क्षेत्र के भारत की ओर वाले हिस्से को अटारी कहा जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए अब यह निर्णय लिया गया है कि भारत में स्थित सीमा क्षेत्र को अटारी बॉर्डर कहा जाएगा. यह भी कहा गया है कि अटारी गाँव महाराजा रंजीत सिंह की सिख वाहिनी के नामी सेनापति शाम सिंह अटारीवाला का जन्म स्थान है इसलिए इस नाम का ऐतिहासिक महत्व है. हालांकि दोनों ओर से खुले सीमा क्षेत्र की मांग करते आ रहे लोगों का कहना है कि सरकार के इस क़दम से कोई फ़ायदा नहीं होगा और यह नया नाम केवल सरकारी कामकाज और दस्तावेज़ों तक सिमट कर रह जाएगा. भारत की ओर से यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों देश इस सीमा क्षेत्र से आवागमन को आसान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें पटरियों पर लौट रही है थार एक्सप्रेस16 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस पाक ने नई पेशकश का स्वागत किया 24 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस अमृतसर-लाहौर बस सेवा 20 जनवरी से 21 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'अपने घर के दरवाज़े मेरे लिए नहीं खुले...'12 मई, 2005 | भारत और पड़ोस रेल सेवा शुरू करने पर भारत-पाक राज़ी03 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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