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पटरियों पर लौट रही है थार एक्सप्रेस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय राज्य राजस्थान को पाकिस्तान के सिंध प्रांत से जोड़ने वाली रिश्तों की रेल, थार एक्सप्रेस शुक्रवार को आधी रात बाद फिर से पटरियों पर दौड़ती नज़र आएगी. पिछले वर्ष भारत के थार मरुस्थल में भारी वर्षा और बाढ़ में हुए नुकसान के बाद 19 अगस्त, 2006 को थार एक्सप्रेस का आवागमन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा था. इस क्षतिग्रस्त रेलमार्ग की मरम्मत और पुनर्निर्माण में रेलवे को छह महीने का वक़्त लग गया. जोधपुर में रेल प्रबंधक एके खन्ना ने बीबीसी को बताया कि थार एक्सप्रेस शुक्रवार की आधी रात बाद जोधपुर से प्रस्थान करेगी और शनिवार की सुबह पश्चिमी सीमा पर स्थित भारत के आखिरी रेलवे स्टेशन मुनाबाव पहुँचेगी. वहाँ से यह रेलगाड़ी सरहद पार करके पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दाखिल होगी. सरहदों के पार पहले छह महीनों के लिए पाकिस्तान की रेल दोनों ओर आवाजाही कर रही थी पर इस बार भारत की रेलगाड़ी दोनों ओर आवाजाही करेगी. पाकिस्तान ने थार एक्सप्रेस को सीमा पार ले जाने वाले 30 रेलवे कर्मचारियों के लिए वीज़ा जारी कर दिया है. भारतीय रेलवे ने इस नई पारी के लिए थार एक्सप्रेस को सजा-संवारकर सुरक्षा बलों की चौकसी में जोघपुर रेलवे स्टेशन पर खड़ा कर दिया है. थार एक्सप्रेस से हर सप्ताह 400 यात्री सीमा पार जा सकेंगे जबकि इतनी ही संख्या में यात्री भारत आ सकेंगे. हालांकि पिछले दो दिनों में इस गाड़ी पर यात्रा करने के कुल 40 टिकट ही बिक सके हैं. रेल अधिकारियों के अनुसार जैसे-जैसे लोगों को इस रेलगाड़ी के फिर से शुरू होने का पता चलेगा, यात्रियों की संख्या बढ़ेगी. रिश्तों की पटरी कोई 41 वर्षों तक सिंध और राजस्थान के बीच रिश्तों की रेल बंद रहने के बाद गत वर्ष 19 फरवरी को फिर से पटरी पर आई थी.
यह रेलगाड़ी छह महीने इन पटरियों पर दौड़ी और इस दौरान क़रीब 31 हज़ार यात्रियों ने थार एक्सप्रेस से यात्रा की और अपने परिजनों से मुलाक़ात की. रेलमार्ग फिर से बहाल होने से लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है. कभी पाकिस्तान छोड़कर भारत के कच्छ क्षेत्र में आ बसे सकई सिंह कहते हैं, "लोग अब कम समय और कम पैसे में ही अपने रिश्ते-नातेदारों से मिल सकेंगे. बाड़मेर से सिंध का फासला महज 125 किलोमीटर है पर इस रास्ते के बंद होने के कारण लोगों को आने-जाने के लिए वाघा बार्डर के रास्ते लगभग 2500 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी." ग़ौरतलब है कि मुनाबाव-खोखरापार मार्ग वर्ष 1965 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध के समय बंद कर दिया गया था. तत्कालीन जोधपुर रियासत ने सिंध और राजस्थान (मारवाड़) को जोड़ने वाले इस रेल मार्ग का वर्ष 1900 में निर्माण करवाया था. वर्ष 1900 की 22 दिसंबर को वहाँ ट्रेन चलने भी लगी थी. | इससे जुड़ी ख़बरें पाक ने नई पेशकश का स्वागत किया 24 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस फिर पटरी पर दौड़ी थार एक्सप्रेस18 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस थार एक्सप्रेस को हरी झंडी मिली06 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'अपने घर के दरवाज़े मेरे लिए नहीं खुले...'12 मई, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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