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'विस्फोट करने वालों को सहायता दी थी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अधिकारियों का कहना है कि हैदराबाद में हुए दो विस्फोटों के सिलसिले में गिरफ़्तार एक अभियुक्त ने माना है कि उसने हमलावरों को कई तरह की सहायता उपलब्ध करवाई थी. अधिकारियों का कहना है कि कलीम उर्फ़ रफ़ीक ने स्वीकार किया है कि उन्होंने हमलावर चरमपंथियों को मोबाइल के सिम सहित कई सहायताएँ उपलब्ध करवाईं थीं. अधिकारियों का कहना है कि बैंगलोर में फ़ोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में किए गए नार्को टेस्ट में कलीम ने अपने एक और साथी सैयद इमरान ख़ान द्वारा दी गई जानकारियों की पुष्टि की है. इन जानकारियों के आधार पर अधिकारियों ने कहा है कि वे इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि मार्च में मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट और पिछले दिनों दो स्थानों पर हुए विस्फोटों के पीछे एक ही संगठन का हाथ है. हालांकि जाँच अधिकारियों ने साफ़ नहीं कहा है कि इसके पीछे कौन सा संगठन है लेकिन उनका कहना है कि अब तक मिले सुरागों से संकेत मिलता है कि इसके पीछे बांग्लादेश का संगठन हरकतउल जेहाद-ए-इस्लामी का हाथ है. उल्लेखनीय है कि गत 25 अगस्त को हैदराबाद में दो स्थानों पर हुए विस्फोट में 42 लोगों की मौत हुई थी और कोई 60 लोग घायल हुए थे. आंध्र प्रदेश पुलिस ने इस सिलसिले में चार लोगों को गिरफ़्तार किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है. जाँच से मिले सबूतों के आधार पर सरकार ने बांग्लादेश सरकार से सहायता भी माँगी है. | इससे जुड़ी ख़बरें बांग्लादेश से सहयोग मांगा भारत ने04 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस सुरक्षा व्यवस्था में कहाँ कमी रह जाती है? 01 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस हैदराबाद विस्फोट मामले में गिरफ़्तारी 01 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस धमाकों के पीछे बाहरी हाथ: राजशेखर26 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस सरकार धमाकों से डरने वाली नहीं: पाटिल26 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस हैदराबाद धमाकों में 42 की मौत26 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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