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नए सख़्त क़ानून की ज़रूरत नहीं: पाटिल
पाटिल
धमाकों में 43 लोग मारे गए और लगभग साठ लोग घायल हो गए
हैदराबाद धमाकों के मामले में लोकसभा में लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि कोई नए सख़्त क़ानून बनाने की ज़रूरत नहीं है. उन्होंने केंद और राज्यों में सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाने और उन्हें अतिरिक्त धन देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है.

उनका कहना था कि ऐसे कठोर क़ानून निर्दोष व्यक्ति की रक्षा नहीं कर सकते, केवल और 'आतंकवादी' बनाते हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि मौजूदा क़ानूनों में यदि संशोंधन की ज़रूरत हो तो ये संभव है.

ग़ौरतलब है कि हैदराबाद में हुए बम धमाकों में 43 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक घायल हो गए थे.

लोकसभा में बोलते हुए शिवराज पाटिल ने कहा, "यदि केंद्र के स्तर पर और राज्यों में भी आम सहमति बने तो कुछ सांसदों के सुझाव पर एक केंद्रीय एजेंसी का गठन हो सकता है जो विशेष अपराधों की ही जाँच करे, जिन्हें संघीय अपराध की संज्ञा दी जाए."

लेकिन उनका कहना था कि वे ऐसा कोई सुझाव किसी राज्य पर थोपना नहीं चाहते क्योंकि क़ानून-व्यवस्था राज्यों का मामला है और यदि आम राय बनती है तभी ऐसा किया जा सकता है.

 यदि केंद्र के स्तर पर और राज्यों में भी आम सहमति बने तो कुछ सांसदों के सुझाव पर एक केंद्रीय एजेंसी का गठन हो सकता है जो विशेष अपराधों की ही जाँच करे, जिन्हें संघीय अपराध की संज्ञा दी जाए
केंद्रीय गृह मंत्री

पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की ओर इशारा करते हुए गृह मंत्री का कहना था कि ऐसा कहा गया है कि क़ानून को नर्म करने से ऐसी घटनाएँ हो रही हैं, लेकिन ऐसा नहीं है.

'पहले भी ऐसा हुआ'

पाटिल का कहना था, "तथ्यों से ये साबित नहीं होता कि क़ानून को नर्म करने से ऐसा हो रहा है. पहले भी कई कुछ हुआ है - गुजरात और दिल्ली में...क़ानून में संशोधन की ज़रूरत हो सकती है..."

उन्होंने सांसदों से अनुरोध किया कि वे जारी की गई 60 पन्ने की एक पत्रिका को गंभीरता से पढ़ें जिसमें उनके बताए गए अनेक सुझावों पर काम हो गया है जिनमें गुप्तचर एजेंसियों को मज़बूत करना शामिल है.

उनका ये भी कहना था कि केंद्र और राज्य सरकारों के पुलिस बल को बढ़ाना ज़रूरी है और उन्हें और धन भी उपलब्ध कराना होगा.

कई सांसदों ने इस बात पर आपत्ति जताई कि गृह मंत्री ने आंध्र प्रदेश सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि ग्रामीण इलाक़ों में नक्सलवादी की समस्या का सामना करने में राज्य सरकार काफ़ी सफल रही है.

आडवाणी के तीख़े तेवर

इससे पहले विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मनमोहन सिंह सरकार की कड़ी आलोचना की और यूपीए सरकार पर मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति अपनाने का आरोप लगाया जिसका कांग्रेस सांसदों ने विरोध किया.

विपक्ष के नेता ने चरमपंथ से जुड़े पुराने मामले गिनाए और कहा कि किसी भी घटना में केंद्र सरकार की कार्रवाई के बाद कोई ख़ास प्रगति नहीं हुई है.

उनका कहना था, "हैदराबाद मे पिछले दिनों भी मक्का मस्ज़िद में ऐसी घटना हुई है और ताज़ा घटना के बारे में खुफ़िया विभागों की जानकारी के बाद भी कोई उपाय नहीं किए गए."

 हैदराबाद मे पिछले दिनों भी मक्का मस्ज़िद में ऐसी घटना हुई है और ताज़ा घटना के बारे में खुफ़िया विभागों की जानकारी के बाद भी कोई उपाय नहीं किए गए
लालकृष्ण आडवाणी

इससे पहले जनता दल (यूनाइटेड) के नेता प्रभुनाथ सिंह ने बहस की शुरुआत करते हुए गृह मंत्री शिवराज पाटिल पर निशाना साधा.

उनका कहना था कि गृह मंत्री पिछले दिनों में हो रही चरमपंथी घटनाओं पर रोक लगाने में असमर्थ रहे हैं.

बहस में हिस्सा लेते हुए वामपंथी नेता मोहम्मद सलीम ने कहा कि किसी भी चरमपंथी घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए न कि जांच से पहले किसी वर्ग विशेष को निशाना बनाया जाना चाहिए.

समाजवादी पार्टी नेता मोहन सिंह का कहना था कि पिछले तीन वर्षों में संसद में सबसे अधिक स्थगन प्रस्ताव आतंकवाद के मसले पर ही लाए गए हैं और इसके बावजूद सरकार इन घटनाओं पर नियंत्रण करने मे असफल रही हैं.

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