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पाकिस्तानी मंत्री को अवमानना नोटिस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने संसदीय मामलों के मंत्री डॉक्टर शेर अफ़गन ख़ान नियाज़ी को न्यायालय की अवमानना करने के आरोप में नोटिस जारी किया है और अपनी सफ़ाई पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है. शेर अफ़गन ने उस फ़ैसले पर कोई टिप्पणी की थी जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनके भाई शहबाज़ शरीफ़ को स्वदेश वापसी और देश में रहने का पूरा अधिकार है. शेर अफ़गन ने विभिन्न टेलीविज़न चैनलों पर दिए इंटरव्यू में कह दिया था कि शरीफ़ भाइयों पर न्यायालय का जो फ़ैसला आया हुआ है उससे राजनीतिक दलों पर असर पड़ा है और और न्यायालय ख़ुद भी एक पार्टी बना नज़र आता है. उन्होंने यह भी कहा था कि जजों को जस्टिस पार्टी बना लेनी चाहिए. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने शुक्रवार को शेर अफ़गन के वे इंटरव्यू टेलीविज़न चैनलों पर देखने के बाद स्वतः ही नोटिस लिया और संघीय मंत्री को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी करते हुए उसका विवरण दो सप्ताह के भीतर देने का आदेश दिया है. शेर अफ़गन दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब पेश करेंगे जिसके बाद न्यायालय इस मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगा. उधर शेर अफ़गन ख़ान नियाज़ी का कहना है कि वह सिर्फ़ अपनी निजी राय व्यक्त कर रहा था. न्यायालय ने जब पाकिस्तान के एटॉर्नी जनरल से शेर अफ़गन के इंटरव्यू में कही गई बातों के बारे में जानकारी हासिल की तो उन्होंने भी कहा कि शेर अफ़गन की भाषा में अदालत की अवमानना नज़र आती है. अदालत ने एटॉर्नी जनरल को मंत्री की तरफ़ से न्यायालय में पेश होने का भी हुक्म दिया है. क़ानून के कई जानकारों का मानना है कि शेर अफ़गन नियाज़ी ख़ान का बयान ग़ैर ज़िम्मेदाराना था और ये उनके लिए कठिनाइयाँ खड़ी कर सकता है. जानकारों का कहना है कि किसी अदालती फ़ैसले पर अपने विचार तो रखे जा सकते हैं लेकिन अदालती प्रक्रिया और कार्रवाई पर टिप्पणी की क़ानून इजाज़त नहीं देता है. क़ानूनी प्रावधानों के अनुसार अगर शेर अफ़गन ख़ान नियाज़ी अदालत की अवमानना के दोषी पाए जाते हैं तो छह महीने तक की जेल की सज़ा हो सकती है और उस सज़ा की वजह से राष्ट्रीय एसेंबली की उनकी सदस्यता भी समाप्त हो सकती है. |
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