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'जापान रिश्ते मज़बूत करने का इच्छुक' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए भारत के साथ रिश्तों को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि जापान इन्हें और प्रगाढ़ करने का इच्छुक है. उन्होंने संसद को संबोधित करते हुए कहा,'' जापान ने भारत को एक सहयोगी और दोस्त के रूप में नए सिरे से पहचान की है.'' आबे का कहना था कि जापान भारत के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है, यह हमारे बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल से साफ़ है. उन्होंने उम्मीद जताई कि व्यापक आर्थिक समझौते पर जल्दी सहमति हो जाएगी जिससे आगामी तीन वर्षों में आपसी व्यापार 20 अरब डालर के स्तर पर पहुँच जाएगा. उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के अलावा भारत की ऊर्जा ज़रूरतों के क्षेत्र में सहयोग की बात कही, लेकिन उन्होंने इस दौरान परमाणु ऊर्जा का उल्लेख नहीं किया. सन् 2000 के बाद भारतीय संसद को संबोधित करने वाले वो पहले विदेशी नेता हैं. आखिरीबार सन् 2000 में अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने संसद को संबोधित किया था. जापान के प्रधानमंत्री बुधवार की शाम को भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बातचीत करेंगे. दोनों नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर बातचीत होगी. अमरीका के साथ हुए असैनिक परमाणु समझौते पर वामपंथियों के विरोध के बावजूद दोनों नेताओं के बीच असैनिक परमाणु सहयोग पर भी बातचीत की संभावना है. जापान के प्रधानमंत्री आबे मंगलवार को तीन दिन के दौरे पर भारत पहुँचे. उनके साथ लगभग 200 से भी अधिक लोगों का व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी आया हुआ है. आबे ने कहा कि जापान की कंपनियां भारत में निवेश की इच्छुक हैं. उनका कहना था कि ये कंपनियां आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से भारत में अनुकूल माहौल चाहती हैं. आबे ने भारत जापान साझेदारी फोरम की शुरुआत की. इसमें दोनों देशों के उद्योग प्रतिनिधि शामिल हैं. ये फोरम दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए सामरिक संबंधों को मजबूत करने के लिए काम करेगा. मनमोहन सिंह ने जापान के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए उन्हें आश्वासन दिया कि भारत दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के रास्ते की सभी बाधाओं को दूर करेगा. महत्वपूर्ण यात्रा जापान के प्रधानमंत्री की इस भारत यात्रा को कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ऐसा पहली बार है जब जापान का कोई प्रधानमंत्री एक बड़ी तैयारी के साथ भारत आ रहा है.
भारत और जापान दोनों ही देश व्यापार में बढ़ोत्तरी चाहते हैं. जापान के प्रधानमंत्री की इस यात्रा से इसके साफ़ संकेत भी मिल रहे हैं. यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे के साथ 200 से ज़्यादा जापान के बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों के कई प्रमुख कार्यकारी और कुछ विश्वविद्यालयों के कुलपति भी आए हैं. जानकार यह भी मानते हैं कि जापान और भारत एक-दूसरे की भूमिका को भी एक बड़े रूप में देख रहे हैं. दोनों ही देश चीन के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव के मद्देनज़र अपने संबंधों को मज़बूत करने का प्रयास कर रहे हैं. हालांकि 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों की जापान ने तीखी आलोचना की थी पर अब जापान नागरिक क्षेत्र में परमाणु तकनीक को लेकर भारत के साथ सहयोग की ओर बढ़ रहा है. |
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