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जापान के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे अपनी पहली भारत यात्रा पर मंगलवार को राजधानी दिल्ली आ रहे हैं. शिंज़ो आबे की यह तीन दिवसीय यात्रा है. इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा क्षेत्र में अहम समझौते हो सकते हैं. साथ ही असैनिक परमाणु सहयोग के मसले पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत होनी है. हालांकि भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने बताया कि इस बातचीत के दौरान अमरीका और भारत के बीच हो रहा परमाणु समझौता मुद्दा नहीं होगा. उन्होंने कहा, "हम जापान के प्रधानमंत्री से परमाणु समझौते पर सहयोग की माँग नहीं करने वाले हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय असैनिक परमाणु सहयोग के दायरे को कैसे बढ़ाया जाए और इसमें किस तरह के बदलाव लाए जाने चाहिए, इसपर बातचीत हो सकती है." ग़ौरतलब है कि जापान के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब देश में अमरीका के साथ परमाणु समझौते को लेकर राजनीतिक गतिरोध क़ायम हो गया है. इस समझौते का विरोध कर रहे केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों का कहना है कि इस समझौते को ठंडे बस्ते में रखा जाए और इस बारे में सरकार अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और परमाणु सप्लाई ग्रुप (एनएसजी) से बातचीत बंद करे. जापान भी एनएसजी के 45 देशों में से एक है. अपनी यात्रा के दौरान जापानी प्रधानमंत्री भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करेंगे. साथ ही बुधवार को संसद के एक संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे. महत्वपूर्ण यात्रा जापान के प्रधानमंत्री की इस भारत यात्रा को कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ऐसा पहली बार है जब जापान का कोई प्रधानमंत्री एक बड़ी तैयारी के साथ भारत आ रहा है. वर्ष 2006 में भारत और जापान के बीच व्यापार भारत और चीन के बीच हो रहे व्यापार के चार प्रतिशत से भी कम था पर दोनों ही देश अब इसमें बढ़ोत्तरी चाहते हैं. जापान के प्रधानमंत्री की इस यात्रा से इसके साफ़ संकेत भी मिल रहे हैं. यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे के साथ 100 से ज़्यादा की तादाद में जापान के बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों के कई प्रमुख कार्यकारी और कुछ विश्वविद्यालयों के कुलपति भी आ रहे हैं. जानकार यह भी मानते हैं कि जापान और भारत एक-दूसरे की भूमिका को भी एक बड़े रूप में देख रहे हैं. दोनों ही देश चीन के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव के सापेक्ष अपने संबंधों को मज़बूत करने का प्रयास करेंगे. हालांकि 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों की जापान ने तीखी आलोचना की थी पर अब जापान नागरिक क्षेत्र में परमाणु तकनीक को लेकर भारत के साथ सहयोग की ओर बढ़ रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें संसदीय चुनाव में आबे की पार्टी की हार29 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना 'जापान विश्व युद्ध का इतिहास स्वीकार करे'12 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना मनमोहन सिंह जापान की यात्रा पर 13 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना उत्तर कोरिया पर चीन-जापान का कड़ा रूख़08 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना जापानी राजकुमारी ने बेटे को जन्म दिया06 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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