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'आर्थिक विकास का लाभ सबको मिले ' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पहली बार देश को संबोधित करते हुए कहा है कि विकास में असमानता से प्रगति रुक जाती है और ज़रूरत है कि आर्थिक उदारीकरण का पूरा फ़ायदा समाज के हर वर्ग तक पहुँचे. पिछले महीने राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने वाली राष्ट्रपति पाटिल ने कहा कि ऐसा करने से ही स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार किया जा सकता है. उनका कहना था कि स्वतंत्रता सेनानियों ने केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का सपना नहीं देखा बल्कि इसे सभी के लिए बराबरी और समृद्धि का ज़रिया बनाने का सपना भी देखा था. राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का कहना था कि प्रगति सामाज के हर वर्ग के लिए हो ताकि कठोर मेहनत कर रही आम जनता और जो लोग ग़रीबी की रेखा से नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उन्हें भी आर्थिक विकास का फ़ायदा हो. उनका कहना था कि समाज में आर्थिक दृष्टि के पिछड़े वर्ग के सशक्तिकरण का सपना अभी पूरा होना बाक़ी है. महिलाओं का ध्यान उन्होंने कहा कि जो विकास में आगे हैं वो कम विकसित लोगों को प्रेरणा दें ताकि राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने में सभी का सहयोग मिल सके. राष्ट्रपति पाटिल का कहना था कि इतिहास गवाह है कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. उनका कहना था, "ध्यान रखने की ज़रूरत है कि महिलाएँ समाज के हाशिए पर न रह जाएँ. हम संकल्प लें कि उन्हें हर क्षेत्र में भागीदारी देंगे." अपने भाषण में कृषि क्षेत्र पर विस्तृत चर्चा करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा कि पहली हरित क्रांति के कारण ही हम अपनी इतनी बड़ी जनसंख्या का पेट भर पाए थे. उनका कहना था, "हमें प्रयास करने होंगे कि ऐसी नीतियाँ बने, कदम उठाए जाएँ और तकनीक अपनाई जाए ताकि कृषि क्षेत्र में सक्रिय लोगों को और फ़ायदा हो सके...संपन्न कृषि क्षेत्र से ही प्रगतिशील ग्रामीण अर्थव्यवस्था कायम होगी." धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र देश के बाढ़ प्रभावित इलाक़ों की पीड़ित जनता के प्रति भी उन्होंने सहानुभूति जताई. उनका कहना था कि ऐसे कदम उठाने की ज़रूरत है कि ये दोबारा न हो. उनका कहना था कि साठ साल का फ़ासला तय कर लेने के बाद अब तक हुई प्रगति पर आत्मावलोकन की ज़रूरत है ताकि भविष्य में की जाने वाली कार्रवाई के बारे में सोचा जा सके. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की जड़ें मज़बूत हुई हैं लेकिन जब तक लोकतंत्र की भावना को आत्मसाध नहीं किया जाता तब तक ये मात्र एक राजनीतिक व्यवस्था ही रह जाएगी. उनका कहना था कि भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि एक अरब से ज़्यादा जनसंख्या का देश किस तरह से एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक व्यवस्था में रहते हुए अपने देशवासियों का जीवन स्तर बेहतर कर सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें राजनीतिक इतिहास रचने की प्रतिभा21 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस जीत के रंग से रंगे दो गाँव21 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस यह सिद्धांतों की जीत है: प्रतिभा पाटिल22 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस प्रतिभा पाटिल राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी24 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस क्या महिला राष्ट्रपति होना बस प्रतीकात्मक ही है?26 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस पहली महिला राष्ट्रपति बनीं प्रतिभा पाटिल25 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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