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सोमवार, 30 जुलाई, 2007 को 16:03 GMT तक के समाचार
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वृक्षारोपण
उत्तर प्रदेश सरकार का वृक्षारोपण कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम से जुड़ गया है
उत्तर प्रदेश में एक दिन में एक करोड़ पौधे लगाकर नया विश्व रिकार्ड बनाने के लिए सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं.

राज्य के अधिकारी इस बात से ख़ुश हैं कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने इसे अपने एक खरब वृक्ष लगाने के कार्यक्रम में शामिल कर लिया है.

उत्तर प्रदेश में वन विभाग के प्रमुख सचिव विद्यानंद गर्ग ने बीबीसी को बताया कि उत्तर प्रदेश के 70 जिलों में 9320 जगहों पर एक करोड़ दो लाख पौधे लगाए जाएंगे.

प्रमुख सचिव बताया कि वृक्षारोपण में पूरी तरह से पारदर्शिता बरती गयी है. इसके लिए तय की गई जगहों सूचना इंटरनेट पर भी प्रकाशित की गई है.

गर्ग ने बताया कि एक दिन में इतने अधिक पौधे लगाने का उद्देश्य लोगों में यह जागरूकता फैलाना है कि पौधे लगाकर पर्यावरण को बचाया जा सकता है.

वृक्षारोपण करने के लिये प्रत्येक तय जगह की ज़िम्मेदारी एक अधिकारी को सौंपी गई है. वृक्षारोपण करने की वीडियो रिकार्डिग के भी इंतजाम किये गए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि इन पेड़ों के सींचने और सुरक्षा का भी इंतज़ाम किया गया है.

जागरुकता

पेड़ों की कटाई
पेड़ों की भारी कटाई से पर्यावरण असंतुलन बढ़ रहा है

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी रुपक डे का कहना है कि इस प्रकार वृक्षारोपण करने से लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैल रही है.

लोग वन विभाग के कर्मचारियों से पौधों के वृक्षारोपण के लिए ख़ुद ही संपर्क कर रहे हैं.

वन विशेषज्ञ डॉक्टर रामलखन सिंह ने इस कार्यक्रम का स्वागत किया है लेकिन उनका कहना है कि वर्तमान वन नियम व्यक्तिगत रूप से किसानों की अपनी जम़ीन में पौधे लगाने के लिए बहुत मददगार नहीं हैं.

किसानों को व्यक्तिगत ज़रूरतों पर भी अपनी जम़ीन में लगे पेड़ काटने के लिए भी वन विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है.

ऐसा नहीं करने पर पुलिस उनको अभियुक्त बना लेती है और उनका उत्पीड़न किया जाता है.

डॉक्टर सिंह का सुझाव है कि रिजर्व वन क्षेत्र से बाहर का जो क्षेत्र है उन पर पेड़-पौधों की ज़िम्मेदारी चुनी हुई ग्राम पंचायत के हाथों में देनी चाहिए.

अभी हमारे देश में प्रतिवर्ष लगभग 20 हजार करोड़ की लकड़ी आयात की जा रही है.

श्री सिंह का यह भी कहना है कि किसानों को अपनी जम़ीन पर पेड़ काटने-लगाने की छूट होनी चाहिए. जिससे वह इसे खेती की तरह से इस्तेमाल कर सकें. इससे पर्यावरण में कार्बन डाई आक्साइड का भी संतुलन बराबर रहेगा.

उनका कहना है कि पुराने पेड़ आक्सीजन की खपत अधिक करते हैं और उतनी कार्बन डाई-आक्साइड नहीं सोखते हैं.

डॉक्टर सिंह का कहना है कि पेड़ो को काटने-लगाने से पर्यावरण भी ठीक रहता है.

वन विभाग के अधिकारी इन सुझावों से सहमत हैं. उनका कहना है कि नियमों को उदार बनाने के प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है.

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