|
'चिनार' को बचाने के लिए भूख हड़ताल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर में लगभग 100 छात्र श्रीनगर स्थित कश्मीर विश्वविद्यालय परिसर में अतिथि गृह के निर्माण के विरोध में दो दिन की भूख हड़ताल पर बैठे हैं. अतिथि गृह का निर्माण नसीम बाग में होना प्रस्तावित है. इस बाग को मुगल शासक ने बनवाया था. छात्रों का कहना है कि प्रस्तावित निर्माण कार्य से चिनार के पेड़ों के कटने का ख़तरा है. मुगल शासकों ने इस बाग में 1000 से अधिक चिनार के पेड़ लगाए थे, जिनमें से अब कुछ ही बचे हैं. विरासत भूख हड़ताल पर बैठे फ़ारुख़ अहमद कहते हैं, "विश्वविद्यालय प्रशासन महान विरासत को नष्ट करने पर आमादा है, यह प्रशासन की ग़ैरज़िम्मेराना कार्रवाई है." उन्होंने कहा, "हम विश्वविद्यालय प्रशासन को अतिथि गृह हरगिज़ नहीं बनाने देंगे, भले ही हमें विश्वविद्यालय से निकाल क्यों न दिया जाए." विश्वविद्यालय के कुलपति अब्दुल वाहिद का कहना है कि चिनार बेशकीमती संपत्ति है, लेकिन विश्वविद्यालय विरासत की श्रेणी में नहीं आता. उन्होंने कहा, "हमें अतिथि गृह की बहुत ज़रूरत है और इसे बनाने के लिए हमारे पास और कहीं ज़मीन नहीं है." भरोसा वाहिद ने कहा कि इंजीनियरों ने हमें भरोसा दिलाया है कि वे अतिथि गृह और नजदीकी चिनार पेड़ के बीच कम से कम 15 मीटर का फ़ासला रखेंगे. लेकिन राज्य के चिनार विकास अधिकारी का कहना है कि चिनार की जड़ें बहुत दूर तक फैली होती हैं और पेड़ तभी बच सकता है, जबकि निर्माण कार्य कम से कम इससे 50 मीटर दूर हो. उनका कहना है कि अगर अतिथि गृह बनता है तो इससे चिनार को ख़तरा है और वह धीरे-धीरे सूखकर नष्ट हो जाएगा. चिनार को राजसी वृक्ष माना जाता है और सैकड़ों साल पहले घाटी में रोपा गया यह पौधा आज कश्मीर की ख़ास पहचान है. चार साल पहले हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार पिछले 30 वर्षों में भारत प्रशासित कश्मीर में लगभग 30 हज़ार से अधिक चिनार के पेड़ काटे या नष्ट किए गए हैं. 1976 में राज्य में क़रीब 42000 चिनार के पेड़ थे जो अब घटकर मात्र 16000 रह गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें देवघर के पंडों के पास है सदियों पुरानी व्यवस्था12 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस वादी में लहलहाती नशे की फ़सल17 मई, 2007 | भारत और पड़ोस ख़ुश हैं कश्मीर के फल-मेवा व्यापारी06 मई, 2006 | भारत और पड़ोस अमरनाथ शिवलिंग को लेकर उठे सवाल18 जून, 2006 | भारत और पड़ोस विकलांगों को मिला सेना का सहारा26 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस पहले भी मंदिरों पर हुए हैं हमले07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||